सिकंद्राबाद। ।भारत पुष्प/पवन शर्मा। आजकल देखा जा रहा है की चारों तरफ लूट-खसोट, रेप, छैनैति, हत्या, मारपीट, जुआ यह सबकुछ कलयुग महाराज की मेहरबानी से हो रहा है क्योंकि महाभारत काल में जब पांडव युद्ध जीतकर राजपाठ कर रहे थे तभी श्री कृष्ण जी महाराज हस्तिनापुर गये और पांडवों से कहा की अब कलयुग आने वाला है इसलिए आप सभी पहाड़ों में जाकर गल जाओ यानी अपने आप को नष्ट कर दो। तभी पांडव लोग अपने पोते परीक्षित को राजपाठ सोंप कर पहाड़ों में चले गए थे उधर राजा परीक्षित राज़ करने लगे तब एक दिन जब जंगल में शिकार खेलने गये तो वहां श्रृंगी महात्मा तपस्या कर रहे थे तभी राजा परीक्षित ने पानी पीने की इच्छा व्यक्त की श्रृंगी ऋषि तपस्या से लीन होने के कारण राजा को पानी नहीं दे सके तो राजा ने एक मरा हुआ सर्प ऋषि के गले में डाल दिया इस बात की खबर जब ऋषि के पुत्र को लगी तो उसने राजा को श्राप दे दिया और कहा की आज से सातवें दिन उस राजा परीक्षित को तक्षक नाग डस लेगा इस बात से राजा भयभीत हो गया और उसी श्रृंगी ऋषि के पास जाकर गलती की क्षमा मांगते हुए कहा की इस श्राप का उपाय बताओं तब ऋषि ने कहा की आप शुक्रताल तीर्थ में श्रीमद् भागवत कथा का रसास्वादन करे तभी आपको मोक्ष प्राप्त होगा तभी से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होने लगा। ओर तभी से कलयुग महाराज का राजपाठ भी शुरू हो गया इसलिए इस कलयुग में सभी प्रकार के अत्याचार होने लगे यह भी राजा परीक्षित ने कलयुग महाराज से कहा था।
उसी क्रम में मुहल्ला कायस्थबाडा़ पर स्थित मंदिर श्री शिवालय हरदयाल पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में भक्त प्रहलाद कथा का रसास्वादन बाल शास्त्री सत्यम ने व सरस कथावाचक शास्त्री ब्रजमोहन बलीपुर ने माता अनसुईया की कथा का रसास्वादन कराया जिसे सुनकर श्रद्धालु मन मुग्ध हो उठे।
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