गुलावठी। ।भारत पुष्प/पवन शर्मा। हमारे भारत देश मे सनातन धर्म व आस्था के प्रतीक जनवरी यानी माघ मास के शुक्ल पक्ष की दौज को जगह-जगह बूड़े बाबू की दौज का मेला लगता है और इस मेले मे श्रृद्धालु मन मे विश्वास कर जाता है की वो तालाब में मिट्टी निकालकर गुड़, चावल-दाल, दक्षिणा, से पूजा अर्चना कर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता है और माताएं अपने बच्चो को तालाब के जल से मुंह धोकर मिट्टी से तिलक लगाकर फुंसी फोड़े ठीक होने की कामना करती है और मंदिर में बाबा के मठ पर शीश झुकाकर आशीर्वाद प्राप्त करते है और भभूत भी ग्रहण करते है।
उसी क्रम में मंगलवार को क्षेत्र के गांव मुहाना में बूड़े बाबू की दौज का मेले का आयोजन कराया गया। इस मेले में दूर दराज से आये हजारो श्रृद्धालुओ नें भाग लिया और तालाब में मिट्टी निकालकर गुड़, दाल-चावल, कपड़ा वस्त्र, दक्षिणा अर्पित कर नमन करके अपने बच्चों के मुँह धोकर मिट्टी लगाकर फुंसी फोड़े ठीक होने की कामना की ओर उसके बाद बाबा के मंदिर में बूड़े बाबा के मठ पर शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। इसी बाबत हमारे संवाददाता नें ग्राम प्रधान रविन्द्र यादव से वार्ता की तो बताया की इस मुहाना गांव में काफी वर्षों से बूड़े बाबू की दौज का मेला लगता चला रहा है और इस तालाब व मठ की मान्यता व शक्ती है की श्रृद्धालुओ के बच्चों की बिमारीयां मन्नत मांगने से पूर्ण हो जाती है।
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