–राष्ट्रभक्ति, सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता एवं गौरवशाली इतिहास पर हुआ प्रेरणादायी मार्गदर्शन
खुर्जा। ।भारत पुष्प। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, खुर्जा नगर द्वारा युवा एकत्रीकरण कार्यक्रम सरस्वती विधा मंदिर मे आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं एवं स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं मार्गदर्शक महेन्द्र, विभाग सामाजिक समरसता प्रमुख ने युवाओं को भारत की सनातन संस्कृति, राष्ट्र की गौरवशाली परंपरा, सामाजिक एकता, वीरता तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका के विषय में प्रेरणादायी मार्गदर्शन प्रदान किया। अपने संबोधन में महेन्द्र ने कहा कि भारत की भूमि में जन्म लेना स्वयं में सौभाग्य की बात है। भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही सनातन संस्कृति, ज्ञान, आध्यात्मिकता और जीवन मूल्यों की भूमि है। हमारी संस्कृति में सृष्टि के निर्माण से लेकर विभिन्न युगों की गौरवशाली कथाएं और जीवन को दिशा देने वाले आदर्श विद्यमान हैं। सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग की परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक युग में समाज को धर्म, कर्तव्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब समाज में एकता और संगठन की भावना कमजोर होती है तो उसका लाभ विरोधी शक्तियां उठाती हैं। इसलिए समाज को संगठित, जागरूक और परस्पर सहयोगी बनाना आवश्यक है।
उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि “यदि हम एक रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे।” सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारा राष्ट्र की शक्ति का आधार है। भारत के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह देश वीरों और महापुरुषों की भूमि रहा है। प्राचीन काल में तक्षशिला जैसे शिक्षा केंद्र विश्वभर में ज्ञान के प्रमुख केंद्र रहे, जहां दूर-दूर से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते थे। उन्होंने सिकंदर के भारत अभियान का उल्लेख करते हुए राजा पोरस के पराक्रम को याद किया और कहा कि भारत की धरती पर विदेशी आक्रमणकारियों का सामना करने वाले वीरों की कभी कमी नहीं रही। उन्होंने भारत की वीर नारियों के साहस और त्याग का उल्लेख करते हुए महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज तथा जौहर की वीर गाथाओं को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भारत को गुलाम बनाना कभी आसान नहीं रहा। भारत की शक्ति को कमजोर करने के लिए समय-समय पर समाज में विभाजन पैदा करने के प्रयास किए गए और फूट डालो और राज करो जैसी नीतियों का सहारा लिया गया। इसलिए आज आवश्यकता है कि समाज के सभी वर्गों के बीच आत्मीयता, समानता और समरसता का भाव मजबूत हो। महेन्द्र ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यपद्धति का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ की शाखा केवल शारीरिक अभ्यास का स्थान नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति निर्माण और राष्ट्र निर्माण की कार्यशाला है। शाखा में स्वयंसेवकों के अंदर अनुशासन, संस्कार, सेवा, संगठन, राष्ट्रभक्ति तथा समाज के प्रति अपने कर्तव्यों की भावना विकसित होती है। धर्म और संस्कृति के प्रति आस्था तथा राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव भी स्वयंसेवक के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होना स्वयंसेवकों के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है। इतने लंबे समय से संघ निरंतर समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में व्यक्ति निर्माण, सेवा, संगठन और राष्ट्र जागरण का कार्य कर रहा है। आज आवश्यकता है कि युवा इस कार्य को समझें और अपने जीवन में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। जापान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जापान ने कठिन परिस्थितियों से निकलकर बहुत कम समय में उल्लेखनीय प्रगति की। वहां के नागरिकों में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी, अनुशासन और समर्पण की भावना दिखाई देती है। इसी प्रकार भारत के युवाओं में भी राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, परिश्रम और संगठन की भावना मजबूत हो तो भारत को विश्व में और अधिक सशक्त एवं गौरवशाली स्थान प्राप्त हो सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि राष्ट्र सर्वोपरि है। जब व्यक्ति अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के बारे में सोचता है, तभी वास्तविक राष्ट्र निर्माण संभव होता है। भारत की प्राचीन संस्कृति, ज्ञान परंपरा और गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर युवा आधुनिक भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। कार्यक्रम में उपस्थित स्वयंसेवकों एवं युवाओं ने राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति अपने दायित्वों को समझने तथा सामाजिक एकता एवं समरसता को मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का वातावरण राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, संगठन एवं सनातन संस्कृति के प्रति आस्था से ओत-प्रोत रहा। युवा एकत्रीकरण का उद्देश्य युवाओं को भारत के गौरवशाली अतीत से परिचित कराते हुए उन्हें वर्तमान में राष्ट्र निर्माण के लिए सक्रिय एवं जिम्मेदार भूमिका निभाने हेतु प्रेरित करना रहा।
![]()
