जहांगीरपुर: (भारत पुष्प/मनोज सिंह/कृष्णा वत्स) साधन सहकारी समिति जहांगीरपुर के निकट हो रहे श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से पधारे पूज्य संत श्री विष्णु दास जी महाराज ने कहा कि भगवान की रास लीला श्रीमद्भागवत जी का प्राण है, यह साधारण अग्यानी मनुष्यों को आसानी से समझ में नहीं आने वाला है। त्रेतायुग में दण्डक वन में जिन साधक और तपस्वियों ने श्री राम जी के लावण्य रूप को देख कर उन पर मुग्ध हुए थे वही कृष्णावतार में गोपी बनकर प्रकट हुए थे और परमब्रह्म श्री कृष्ण से संयोग कर उस परम रस का आस्वादन किया । वेदों की ऋचाएं भी गोपी का रूप लेकर व्रज में प्रकट हुई हैं वही ऋचाएं जब श्री कृष्ण को नन्द के आंगन में खेलते हुए देखती हुए देखती हैं तो कहती हैं कि साक्षात् परमब्रह्म ही आज नन्द के आंगन में धूल धूसरित होकर  नृत्य कर रहा है। इस अवसर पर मुकेश प्रताप सिंह एडवोकेट,महेश प्रधान मास्टर दुर्गा प्रसाद  देवेन्द्र शर्मा, दिनेश कुमार, गुंजन, प्रताप सिंह,मुकटलाल हलवाई त्रिलोकी सिंह आदि उपस्थित रहे।

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