–भगवान श्रीराम व माता सीता के विवाह की लीला का मंचन
खुर्जा। ।भारत पुष्प। जंक्शन रोड स्थित पावन श्री रामलीला मैदान में श्री रामलीला कमेटी (रजि.) के तत्वावधान में आयोजित दिव्य एवं भव्य ‘श्री रामलीला महोत्सव’ में आस्था, भक्ति और अध्यात्म की अविरल त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है। मंगलवार की संध्या को प्रांगण में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम एवं वीर शिरोमणि लक्ष्मण जी द्वारा महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, ताड़का उद्धार तथा सुबाहु वध की आलौकिक एवं कालजयी लीला का अत्यंत जीवंत व प्रेरणास्पद मंचन संपन्न हुआ। मंचन के दौरान महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ में विघ्न डालने वाली दुराचारी ताड़का और सुबाहु के वध के प्रसंग ने भक्तों को आत्म-मंथन की गहन प्रेरणा दी।

महर्षि विश्वामित्र का यज्ञ हमारे अंतःकरण की साधना, सत्कर्म और ज्ञान-यज्ञ का प्रतीक है। जब भी मनुष्य सत्य और साधना के पथ पर अग्रसर होता है, काम, क्रोध और प्रमाद रूपी आसुरी प्रवृत्तियां उसमें विघ्न डालने का प्रयास करती हैं। ताड़का अज्ञान, तमोगुण और अंधकार का रूप है। जब साधक के जीवन में गुरु-कृपा होती है, तभी परमात्मा के दिव्य बाण (ज्ञान और विवेक) से अज्ञान रूपी ताड़का का उद्धार होता है और अंतरात्मा निर्मल बनती है। सुबाहु कुविचारों और वासना की उस अग्नि का प्रतीक है जो धर्म को भस्म करना चाहती है, जबकि मारीच माया और भ्रम का द्योतक है। प्रभु श्री राम द्वारा सुबाहु का अंत और मारीच का पराभव यह संदेश देता है कि भगवत्कृपा से ही मनुष्य माया के भ्रमजाल से मुक्त होकर धर्म के परम पद को प्राप्त कर सकता है।
जैसे ही प्रभु श्री राम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर धर्मविरोधी शक्तियों का संहार किया, समूचा प्रांगण भक्ति-उल्लास से भर उठा और “सियावर रामचंद्र की जय” तथा “जय श्री राम” के नारों से दिशाएं गुंजायमान हो उठीं। बुधवार की संध्या अध्यात्म, भक्ति और मर्यादा के अद्वितीय संगम की साक्षी बनी। कार्यक्रम में प्रभु श्री राम द्वारा शिव धनुष भंजन, मर्यादा व तेज से परिपूर्ण परशुराम–लक्ष्मण संवाद तथा माता सीता व प्रभु श्री राम के दिव्य वरमाला (जयमाला) प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण व नयनाभिराम मंचन किया गया। मंचन के दौरान जैसे ही विश्वामित्र जी की आज्ञा पाकर प्रभु श्री राम ने शिव जी के पिनाक धनुष को स्पर्श कर प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष का भंजन किया, पूरा मैदान “जय श्री राम” और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। धनुष भंग होते ही आकाश से पुष्प वर्षा की गई। इसके उपरांत महर्षि परशुराम के क्रोध और लक्ष्मण जी के तर्कपूर्ण व वीर रस से परिपूर्ण परशुराम–लक्ष्मण संवाद ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रभु श्री राम के अत्यंत विनम्र और शीतल वचनों से महर्षि परशुराम का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने प्रभु के साक्षात ईश्वरीय स्वरूप को पहचानकर नमन किया। तदोपरांत जनक दुलारी माता जानकी ने सखियों संग प्रभु श्री राम के गले में वरमाला डाली। इस दिव्य युगल स्वरूप के दर्शन पाकर उपस्थित हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।
कमेटी पदाधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि प्रभु श्री राम का जीवन केवल एक कथा नहीं, अपितु जीवन जीने की संपूर्ण मर्यादा, धैर्य, गुरु-आज्ञा पालन और धर्मपरायणता की अनुपम शिक्षा है। धनुष भंग का प्रसंग यह संदेश देता है कि अहंकार कितना भी भारी क्यों न हो, सत्य और विनय के सम्मुख उसका टूटना निश्चित है। मंचन के अवसर पर मुख्य रूप से आशीष गोयल (प्रधान), पुनीत साहनी ‘विक्की’ (महामंत्री), सचिन बंसल (कोषाध्यक्ष), दीपक गर्ग – पूर्व चेयरमैन (जनरल मैनेजर), राजीव बंसल – पूर्व चेयरमैन (उपप्रधान), विशाल वाधवा (उपप्रधान), संदीप मित्तल (लीला इंचार्ज), विकास वर्मा (बाड़ा इंचार्ज), सचित गोविल एवं रवि अग्रवाल (मंत्री), विनीत आर्य (सोशल मीडिया प्रभारी), रविकांत भारद्वाज (प्रिंट मीडिया प्रभारी), संदीप मित्तल, राजीव वार्ष्णेय, डीसी गुप्ता, वासुदेव शर्मा, अशोक पालीवाल, राम दिवाकर, संजय शर्मा, जीतू अग्रवाल, अशोक टिम्मी, देवेंद्र आर्य, अंकित गर्ग, राजू रसिक, कृष्णा जौहरी, पवन गुप्ता, शुभम गुप्ता, वैभव जैन, यश गुप्ता अंशु, दीपांशु शर्मा, कैलाश वर्मा, प्रियांशु रुहेला, उमा शंकर अग्रवाल बिंदा वाले, विजय गुप्ता, संजय गुप्ता भगत जी, रवि अग्रवाल, हैप्पी वर्मा, विकास वर्मा, विकास सोनी, आशुतोष गुप्ता और प्रेम प्रकाश अरोरा उपस्थित रहे।
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