सिकंद्राबाद। ।भारत पुष्प/पवन शर्मा। बता दें की हमारे भारत देश में सनातन धर्म के अनुसार जब किसी बच्चे व बड़ों को चेचक-फुंसी-फोड़े-फफलक निकल आते हैं आमजन अपने देवी देवताओं को याद करता है और उनके नाम का उठावना निकाल रख देता है जब कभी उनका पूजा-अर्चना का दिन मेले के रुप में आता है तो वो उस दिन मेले में जाकर देवी देवताओं की पूजा-अर्चना कर प्रार्थना करता है की उसका परिवार सही सलामत रहे। उसी क्रम में मंदिर श्री कृष्ण तालाब पर बराही माता का मेला आयोजित किया गया। बुजुर्गो के बताये अनुसार कहा जाता इस बराही माता के मंदिर की मान्यता व आस्था है की कवार व चैत्र मास की चौदस यानी चतुर्दशी को जो भी दुखी प्राणी बराही माता की पूजा-अर्चना गुड़,दाल,आटा,चावल, कपड़े,दक्षिणा दान करके व तालाब की मिट्टी निकालकर बच्चों के चेहरे पर लगायेगा और तालाब का जल से मुंह धोयेगा और पुजा करेगा उसकी मनोकामना पूर्ण होगी।
श्रद्धालुओं ने बराही माता के मंदिर में जाकर विधीविधान से पूजा-अर्चना की और उसके बाद तालाब पर जाकर मिट्टी निकालकर बच्चों को लगायी और प्रार्थना की कि उनका परिवार सही सलामत रहे। इस बराही माता की पूजा-अर्चना को रावण की मृत्यु से जोड़ा गया बताया जाता है बताया जाता है की जब रावण की मृत्यु हो गयी थी तो उसकी पत्नी मन्दोदरी रावण का पार्थिव शरीर को लेकर मंदिर श्री कृष्ण तालाब पर चार दिन यानी दशहरा से लेकर चौदस तक यही रखकर भगवान की पूजा-अर्चना की थी ताकी रावण पुनः जीवित हो जाये जब नही हुआ तो रावण के पार्थिव शरीर को अग्नि के समर्पित कर दाह-संस्कार करा दिया गया। तभी से नगर सिकंद्राबाद में चौदस को ही रावण वध कर दहन किया जाता है।
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