सिकंद्राबाद। ।भारत पुष्प/पवन शर्मा। हमारे सनातन धर्म के अनुसार क्वार मास में भगवान श्री राम की लीला का मंचन भक्तगण जगह-जगह कराते हैं ताकी हमारे बच्चों को भगवान श्री राम के जीवनकाल के बारे में विस्तृत जानकारी मिल सके और उनके बताए रास्ते पर चलते हैं। उसी क्रम में चल रही रामलीला के चोदवें दिवस यानी चौदस को जब भगवान श्री राम रावण की सारी सेना को समाप्त कर दिया तो रावण घबरा गया और सोचने लगा की अब मैं किसको युद्ध में उतारु तभी रावण को अपना पुत्र अहिरावण की याद आयी और उसको योग शक्ति से लंका बुला लिया और सबकुछ बताकर उससे राम लक्ष्मण को हरण कराकर कर मारने की योजना बनाई और अहिरावण ने दोनों भाईयों को चुरा कर पाताल में ले गया और बलि देने की तैयारी करने लगा इतने में ही राम भक्त हनुमान वहा पहुंच गये और अहिरावण के मंसूबों को नाकाम कर दिया और राम लक्ष्मण को अहिरावण की कैद से छुडा लाये इस बात को सुनकर रावण बौखला गया और खुद ही युद्ध के मैदान में उतर पड़ा राम व रावण में खुब जमकर युद्ध हुआ और अंत में भगवान श्री राम ने रावण को विभीषण की मदद से परमधाम पहुंचा दिया इस प्रकार बुराई का अंत हो गया और सत्य की जीत हो गयी। इसलिए कहते हैं की सच्चाई की हमेशा जीत होती है।
यहां तक की लीला का मंचन वृंदावन से आये कथावाचक पंकज शर्मा की मंडली ने बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया जिसे सुनकर श्रद्धालु भावुक होकर दुःखी हो गये। रामलीला का मंच संचालन अरविंद दीक्षित द्वारा बड़े सुंदर तरीके से किया जा रहा है। इस रामलीला में केमेटी के प्रधान सचिन शर्मा, चैयरमेन पं राकेश शर्मा, राहुल गुप्ता, जगदीश बजाज, राकेश मोहन सर्राफ, अर्जुन के अलावा सभी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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