खुर्जा। ।भारत पुष्प। महर्षि वाल्मीकि जयंती पर श्रद्धांजलि एवं स्वागत संदेश राष्ट्रीय स्वयंसेवक की चाणक्य बस्ती की ओर से किया गया। भारत की सांस्कृतिक परंपरा में जब-जब मर्यादा, सत्य और धर्म के आदर्शों की चर्चा होती है, तब-तब महर्षि वाल्मीकि का नाम आदरपूर्वक स्मरण किया जाता है।
वे केवल आदिकवि ही नहीं, बल्कि भारतीय समाज के आदर्श जीवन दर्शन के प्रतीक हैं। उन्होंने अपनी तपस्या, चिंतन और लेखनी के माध्यम से वह महाकाव्य – ‘रामायण’ रचा, जो युगों-युगों तक मानवता को धर्म, कर्तव्य और आदर्श जीवन का पथ दिखाता रहेगा। महर्षि वाल्मीकि का जीवन इस बात का उदाहरण है कि व्यक्ति चाहे किसी भी परिस्थिति से निकला हो, यदि उसमें सत्य, साधना और सेवा का भाव है, तो वह भी महामानव बन सकता है। एक डाकू ‘रत्नाकर’ से ‘महर्षि वाल्मीकि’ बनने की उनकी यात्रा हमें यह सिखाती है कि आत्मपरिवर्तन ही सच्ची साधना है। आज जब समाज में पुनः संस्कार, समर्पण और स्वाभिमान की आवश्यकता है, तब महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन से प्रेरणा लेकर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इसी भाव को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चाणक्य बस्ती ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान जिला बौद्धिक प्रमुख राजू ने बताया कि संघ का यह सतत प्रयास है कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति के भीतर सेवा, एकता और राष्ट्रप्रेम की भावना प्रज्वलित हो। महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएँ संघ के संस्कारों में भी प्रतिध्वनित होती हैं — स्वयं को सुधारना, समाज को संगठित करना और राष्ट्र के लिए समर्पित रहना है। उन्होनें कहा कि इस जयंती पर हम सब संकल्प लें कि हम अपने जीवन में भी महर्षि वाल्मीकि जी के आदर्शों को आत्मसात करें और भारत को उस ‘रामराज्य’ की दिशा में ले जाएँ, जिसका स्वप्न उन्होंने देखा था। स्वागत करने वालों में जिला बौद्धिक प्रमुख राजू नगर सेवा प्रमुख हैप्पी, नगर शारीरिक शिक्षण प्रमुख सूरज, नगर विद्यार्थी प्रमुख अजय, नगर सह प्रचार प्रमुख पवन और स्वयंसेवक बंधु गोपाल, बादल, अनुराग, मनीष चेतन, रवि आदि मौजूद रहे।
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