खुरजा। ।भारत पुष्प। नगर की शिवाजी बस्ती में विशाल हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन का शुभारम्भ भारत माता के दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसे मुख्य अतिथि अनन्त श्री विभूषित महामंडलेश्वर स्वामी महेशानन्द गिरि जी महाराज (जूना अखाड़ा), अनिल (प्रान्त प्रचारक, मेरठ प्रान्त), विशिष्ट अतिथि डॉ. अर्चना प्रिय आर्य (प्रखर हिन्दू वक्ता) एवं कार्यक्रम अध्यक्ष श्री राहुल राठी ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर किया। अपने बौद्धिक उद्बोधन में प्रान्त प्रचारक श्रीमान अनिल ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हिन्दू समाज के आत्मबोध, संगठन और पुनर्जागरण का पवित्र संकल्प है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिन्दू समाज कोई संकीर्ण पहचान नहीं, बल्कि सनातन जीवन-दृष्टि है, जो वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश देती है। जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर समाज को बाँटने के प्रयासों से सावधान रहने का आह्वान करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में प्रस्तुत पंच परिवर्तन—स्व का बोध, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और परिवार प्रबोधन—को राष्ट्र निर्माण की सशक्त कार्ययोजना बताया।

मुख्य अतिथि स्वामी महेशानन्द गिरि जी महाराज ने अपने ओजस्वी बौद्धिक में कहा कि हिन्दू सभ्यता विश्व की प्राचीनतम और जीवन-मूल्यों से परिपूर्ण सभ्यता है। समाज की शक्ति एकता में निहित है; जाति-पाँति और स्वार्थ ने जब-जब स्थान पाया, तब-तब समाज कमजोर हुआ। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने इतिहास, महापुरुषों और सनातन परम्परा को समझें, नशा व नकारात्मकता से दूर रहकर सेवा, साधना और संगठन के मार्ग पर चलें। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन हिन्दू चेतना को जाग्रत करने का अभियान है, जो संस्कारों को सुदृढ़ कर राष्ट्रबोध को जाग्रत करता है। विशिष्ट अतिथि डॉ. अर्चना प्रिय आर्य ने कहा कि यह हिन्दू सम्मेलन हिन्दू चेतना, आत्मसम्मान और राष्ट्रबोध का उद्घोष है। हिन्दू होना एक संस्कार और कर्तव्य है—जो सत्य के साथ खड़ा होता है और राष्ट्र को सर्वोपरि मानता है। उन्होंने आन्तरिक उदासीनता और विभाजन को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए समाज को सशक्त और मुखर बनने का संदेश दिया। उनका स्पष्ट आह्वान रहा—“हिन्दू जागेगा, राष्ट्र अडिग होगा।”कार्यक्रम का समापन हिन्दू एकता, संगठन और राष्ट्रहित के संकल्प के साथ हुआ। सम्मेलन में सर्व हिन्दू समाज की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे आयोजन ऐतिहासिक और प्रेरणास्पद बना।

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