बुलंदशहर। ।भारत पुष्प। नई चेतना 4.0 जेंडर जागरूकता अभियान 4.0 अंतर्गत महिला हिंसा के विरुद्ध अभियान के अंतर्गत अतिरिक्त सेशन जज सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण DLSA बुलंदशहर एवं उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, बुलंदशहर के सयुक्त तत्वावधान में विधिक जागरूकता कैंप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी निशा और अध्यक्षता अतिरिक्त जिला जज शहजाद अली एवं विशिष्ट अतिथि समन्वयक मिशन शक्ति CO पूर्णिमा रही। सचिव, एडीजे डीएलएसए न्यायाधीश सहजाद अली द्वारा समूह से जुडी महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय क़ानून स्त्री व् पुरुषो में लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करता हो जो कानूनी रूप से भेदभाव निषेधित है किन्तु लिंग आधारित हिंसा, बाल विवाह, भ्रूण हत्या, घरेलु हिंसा, वैवाहिक बाद आदि समस्या आदि जो समाज में हो रही है। DLSA द्वारा बिधिक शिक्षा का उद्देश्य यही है कि व्यक्ति अपने संवेधानिक अधिकारों एवं कर्तव्यो के प्रति जागरूक हो। महिला शक्ति भी अपने हक अधिकार के बारे जाने और किसी भी प्रकार के शोषण के खिलाफ आवाज उठाकर न्याय प्राप्त करे। सीडीओ, बुलंदशहर निशा ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज जब हम ग्रामीण विकास की बात करते हैं, तो हम केवल सड़क, भवन या योजनाओं की बात नहीं करते। हम लोगों की बात करते हैं। हम सम्मान, स्वाभिमान, और हर नागरिक-विशेषकर महिलाओं की उस क्षमता की बात करते हैं, जिससे वे अपने गाँव और समाज का भविष्य स्वयं गढ़ सकें। इसी सोच से जन्म हुआ है नयी चेतना पहल बदलाव की। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की एक सशक्त प्रक्रिया है। आज नयी चेतना डे-एनआरएलएम के अंतर्गत अपने चौथे वर्ष में है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की नेता मानती है। देशभर में और उत्तर प्रदेश में भी, और जनपद बुलंदशहर में इस अभियान में 16 विकास खंडो के 64 संकुल स्तरीय संघो में समूह को जोड़ते हुए जेंडर समानता ज्यादा गतिविधियों 25 नवम्बर 2025 से 31 जनवरी 2026 संचालित की जा रही हैं। नयी चेतना 4.0 का विशेष फोकस है महिलाओं की एजेंसी, यानी सुरक्षित रूप से बाहर निकलने की आज़ादी सुरक्षित कार्यस्थल संस्थाओं तक पहुँच और नेतृत्व में भागीदारी यह पूरी तरह विकसित ग्राम्य भारत की उस परिकल्पना से जुड़ा है, जहाँ महिलाएँ और युवा विकास के स्तंभ हैं। हम बुलंदशहर में प्रत्यक्ष रूप से देख रहे हैं कि कैसे सामाजिक रूड़ियाँ- खासतौर पर महिलाओं की आवाजाही पर रोक उनके रोज़गार, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य और शासन तक पहुँच को प्रभावित करती हैं। नयी चेतना हमें इन बाधाओं से निपटने का संगठित और सहभागी रास्ता देती है। अधिकारों का दावा सामुदायिक सुरक्षा ऑडिट, सोशलोग्रामिंग और मोबिलिटी मैपिंग के माध्यम से महिलाएँ और बालिकाएँ स्वयं उन स्थानों की पहचान कर रही हैं जहाँ वे असुरक्षित महसूस करती हैं- जैसे बाजार, बस स्टैंड, स्कूल या पंचायत भवन। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये बातें अब सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पंचायत, पुलिस और विभागों के साथ साझा होकर ठोस कार्ययोजनाओं में बदल रही हैं। उपायुक्त स्वत: रोजगार सूबेदार सिंह ने कहा कि जनपद में मिशन योजना अंतर्गत अब तक जनपद 13960 महिला स्वयं सहायता का गठन किया जा चुका है। लखपति योजना से विविध विभागो से समन्वय कर दीदियों का आर्थिक सशक्तिकरण किया जा रहा है। समूहों को जेंडर हिंसा और असमानता के प्रति संवेदनशील किया जा रहा है। वर्ष 2011 की जनगणना में जनपद का लिंगानुपात 896 प्रति हजार पुरुषो पर महिलाओं की संख्या थी। महिला साक्षरता-2011 में 55.57 प्रतिशत थी। समूहों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम, घरेलु हिंसा पर भी विशेष बैठक, प्रशिक्षण देकर भी सवेदनशील किया जा रहा है जिससे विकसित भारत और विकसित ग्राम की सोच को आगे बढाया जा सके। ग्रामीण साक्षरता, लिंग अनुपात वृद्धि हो। लड़का लड़की का भेदभाव समाप्त हो समूह गाँव गाँव नयी चेतना अभियान अंतर्गत विविध गतिविधि का आयोजन भी कर रहे है। डीएलएसए से एडवोकेट डॉ लोकेश कुमार द्वारा न्याय सब लिये है। समाज में महिला वर्ग के लिए हो रही हिंसा से बचाव एवं त्वरित न्याय दिलाने हेतु निशुल्क लीगल ऐड क्लिनिक पर पीडिता को निशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त करवाई जाती है। घरेलु हिंसा से बचाव कानून, दहेज़ एक्ट, बाल विवाह रोकथाम, हिन्दू एवं विशेष विवाह अधिनियम, आदि के बारे में जानकारी दी गयी । मिशन शक्ति की समन्वयक CO पूर्णिमा द्वारा समूह की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक तीली आसानी से तोड़ी जा सकती है किन्तु वही तीलिया समूह में संगठित हो जाती है तो उनको तोड़ पाना आसान कार्य नहीं है। जनपद में वर्ष 2024 में महिलाओं से जुड़े अपराध कुल 882 मामले दर्ज हुए एवं वर्ष 2025 में 1004 महिलाओ से जुड़े मामले दर्ज हुए। यह आकडे का विश्लेषण से पता चलता है जेंडर समानता जैसे अभियान की समाज में फैलाने की जरुरत है। महिलाये, लड़की किसी भी असमानता और लिंग आधारित हिंसा से बचाव के लिए पुलिस की मदद ले सकती है। समाज की सोच में सकरात्मक सोच का बदलाव जरुरी है तभी मिशन शक्ति और नयी चेतना के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकेगा। तत्पश्चात समूह की महिलाओं द्वारा जेंडर जागरूकता रैली निकाली गई। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा हरी झंडी दिखाकर रैली का उद्घाटन किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम समूह की महिलाओं द्वारा रंगोली, एकल नृत्य, सामूहिक नृत्य की रंगारंग प्रस्तुति दी। इस अवसर जेंडर चैंपियन अवॉर्ड भी वितरित किए हुए। वही ग्राम सलेमपुर, शिकारपुर में समूह की 100 महिलाओं द्वारा केंडल मार्च की रैली भी निकाली गई। समस्त गतिविधियों का फिल्मांकन भी NMMU की टीम द्वारा किया गया। संचालन एवं आभार मनीष कुमार जैन जिला मिशन प्रबंधक सामाजिक समावेशन, जिला मिशन प्रबंधन इकाई बुलंदशहर द्वारा किया गया।

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