बुलंदशहर। भारत पुष्प। जिलाधिकारी श्रुति के कुशल मार्गदर्शन में शिक्षा, संस्कार और संवैधानिक मूल्यों का अद्भुत संगम देखने को मिला। 77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर जनपद बुलंदशहर में “संविधान लेखन” के माध्यम से एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी कीर्तिमान स्थापित किया गया। इस अनूठी पहल के अंतर्गत समाज के विभिन्न वर्गों से आए 77 बच्चों ने निरंतर 77 घंटों तक भारत के संविधान का लेखन कर राष्ट्रीय एकता, समानता और समावेशी शिक्षा का सशक्त संदेश दिया। इस संविधान लेखन अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समावेशी प्रकृति रही। कार्यक्रम में जनपद में संचालित बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय, पी0एम0 श्री विद्यालय, कस्तूरबा गांधी विद्यालय, मान्यता प्राप्त विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई। दिव्यांग बच्चों ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए अदम्य साहस, धैर्य और एकाग्रता का परिचय दिया। इस कार्यक्रम में बुलंदशहर की निकुंज एकेडमी का महत्वपूर्ण योगदान रहा निकुंज एकेडमी के विद्यार्थियों ने भी इस सामूहिक प्रयास में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का विधिवत समापन बुलंदशहर जिलाधिकारी श्रुति द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले सभी छात्र-छात्राओं की विशेष सराहना करते हुए कहा—“संविधान हमें समानता का अधिकार देता है और आज इन बच्चों ने एक साथ बैठकर संविधान लिखकर उस समानता को जीवंत कर दिया है।”जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने इस आयोजन को “शिक्षा के साथ संस्कारों का महाकुंभ” बताते हुए इसे नई पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रेरक बताया।
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