–स्वतंत्रता, भारतीय इतिहास, हिन्दू संगठन और सामाजिक समरसता पर प्रान्त प्रचारक ने किया मार्गदर्शन
खुरजा। ।भारत पुष्प। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, खुरजा नगर द्वारा रविवार को नगर एकत्रीकरण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने अनुशासनबद्ध रूप से सहभागिता की। इस अवसर पर मेरठ प्रान्त के प्रान्त प्रचारक अनिल ने अपने बौद्धिक में स्वतंत्रता, भारतीय इतिहास, राष्ट्रभाव, हिन्दू संगठन, सामाजिक समरसता तथा वर्तमान भारत में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों सहित विभिन्न विषयों पर स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन किया। प्रान्त प्रचारक ने स्वतंत्रता के विषय पर कहा कि भारत की स्वतंत्रता केवल अंग्रेजी शासन से मुक्ति का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र के आत्मबोध, स्वाभिमान और अपनी संस्कृति के प्रति गौरव से जुड़ा विषय है। भारत ने लंबे समय तक विदेशी आक्रमणों और बाहरी शक्तियों का सामना किया। 1857 के संघर्ष सहित स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए चले लंबे संघर्ष में असंख्य ज्ञात-अज्ञात वीरों ने अपना सर्वस्व राष्ट्र के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों के संघर्ष और त्याग को स्मरण करना तथा नई पीढ़ी को उससे परिचित कराना हमारा दायित्व है। उन्होंने भारत के इतिहास के विभिन्न कालखंडों का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध भारतीय समाज ने समय-समय पर संघर्ष किया। मुगल काल सहित विभिन्न चरणों में अनेक वीरों ने अपनी स्वतंत्रता, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष किया। इतिहास को समझने का उद्देश्य किसी के प्रति द्वेष पैदा करना नहीं, बल्कि अपने अतीत से सीख लेकर राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को समझना होना चाहिए। प्रान्त प्रचारक ने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के जीवन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ ने प्रारम्भ से ही हिन्दू समाज के संगठन को आधार बनाकर राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए व्यक्ति निर्माण का कार्य किया है। शाखा के माध्यम से अनुशासन, संस्कार, सेवा, राष्ट्रभक्ति, आत्मीयता और सामाजिक दायित्व की भावना विकसित की जाती है। उन्होंने कहा कि संघ के कार्य की प्रेरणा से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक संगठन और संस्थाएं राष्ट्रहित में कार्य कर रही हैं। शिक्षा, सेवा, योग, आध्यात्मिकता, सामाजिक जागरण और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव जागृत करना है। प्रान्त प्रचारक ने कहा कि आज देश में अपनी सांस्कृतिक पहचान और हिन्दुत्व को लेकर समाज में आत्मविश्वास बढ़ा है। एक समय ऐसा था जब अपनी सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय पहचान को व्यक्त करने में संकोच दिखाई देता था, लेकिन आज परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने 1991-92 के तिरंगा फहराने से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि आज राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्र के प्रति सम्मान एवं गौरव की भावना अधिक व्यापक हुई है। यह भारत के बढ़ते आत्मविश्वास और राष्ट्रीय शक्ति का परिचायक है। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति केवल आर्थिक या सामरिक शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी वास्तविक शक्ति समाज की एकता, संस्कार, आत्मविश्वास और राष्ट्रभाव में निहित है। समाज को उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम, भाषा अथवा क्षेत्र के आधार पर बांटने के प्रयासों से सावधान रहते हुए एकता और एकात्मता को मजबूत करना चाहिये। प्रान्त प्रचारक अनिल ने गुरु गोविंद सिंह जी एवं चार साहिबजादों के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि भारत के इतिहास में ऐसे अनेक महापुरुष और वीर हुए हैं जिन्होंने धर्म, संस्कृति और समाज की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनके योगदान को किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं किया जा सकता। सामाजिक समरसता के विषय पर उन्होंने कहा कि दलित और हिन्दू को अलग मानने की मानसिकता समाज को कमजोर करती है। महात्मा बुद्ध एवं बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी महापुरुष सम्पूर्ण समाज की धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि शहीदों की कोई जाति नहीं होती और महापुरुष किसी एक जाति के नहीं, बल्कि पूरे समाज के होते हैं। इसलिए महापुरुषों के नाम पर समाज में विभाजन या विवाद के स्थान पर उनके जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर समाज को जोड़ने का कार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे सेवा, अनुशासन, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभक्ति और संगठन के भाव को मजबूत करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि संगठित और संस्कारित समाज ही शक्तिशाली राष्ट्र का आधार बनता है। नगर एकत्रीकरण के दौरान स्वयंसेवकों में उत्साह एवं अनुशासन का वातावरण रहा। कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्र की एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा के प्रति संकल्प को मजबूत करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम राष्ट्रहित एवं समाजहित में निरंतर कार्य करने के आह्वान के साथ सम्पन्न हुआ।
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