सिकंद्राबाद। ।भारत पुष्प/पवन शर्मा। जब कोई व्यक्ति बैंक से लॉन लेता है और समय पर नहीं चुका पाता है तो बैंक अपने पैसे वसूलने के लिए तहसील को भेज देता है और बैंक कर्जा देते समय उसकी जमीन के कागजातों पर बैंक की मौहर भी लगा देता ताकी कर्जदार किसान उसे बेच ना दे। और जब किसान बैंक का पूरा कर्जा चुका देता है तो बैंक नौ डियूज लिख देता है और फिर तहसील प्रशासन उसकी खतौनी में से कर्जा चुका देने के बारे में लिखकर सत्यापन कर देता है मगर ऐसा नहीं होने पर किसान दर पे दर तहसी व बैंक के चक्कर पे चक्कर काटते रहते हैं और समस्या का समाधान नहीं हो पाता है तब जाकर कर्जदार किसी सामाजिक संगठन का सहारा लेकर इस इस समस्या का समाधान कराने की गुहार लगाता है। इसी प्रकार का एक मामला तहसील सिकंद्राबाद क्षेत्र के गांव का सामने आया है।
गांव वीरखेडा़ निवासी दिव्यांग देवऋषि बताया की मेरी मां सुमित्रा देवी ने बैंक से लॉन लिया था और उसके चुकाने के बाद बैंक ने नो डियूज लिख कर दे भी दिया मगर हमारी की खतौनी में से आज तक बैक कर्जा की मुहर नही हटायी गयी है इस मामले की मेने की बार नगर के मुखिया से शिकायत कर समस्या का समाधान कराने की गुहार लगाई थी मगर आज तक भी वह मुहर नही हटायी जा सकी है यह सरकारी मशीनरी की घोर लापरवाही है जिस कारण यह विकलांग परेशान हो रहा है। ओर बताया तहसील में मेरा कर्जा की मुहर नही हटायी जाने पर मेने करप्शन फ्री इंडिया संगठन का सहारा लेकर आज तहसील दिवस में पुनः समाधान की गुहार लगाई है। इस मामले को संज्ञान में लेकर शिकायत सुन रहे तहसीलदार संजय कुमार ने मौके पर अपने अधिनस्थ को बुलाकर तत्काल इस मामले का समाधान कराने का फरमान सुनाया और कहा की जल्द इसे दुरुस्त करा कर मुझे दिखाओ।
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