खुर्जा। ।भारत पुष्प।  ऐतिहासिक और पौराणिक धार्मिक सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक श्री रामलीला महोत्सव के अंतर्गत श्री रामलीला कमेटी (रजि.) के तत्वावधान में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक अभूतपूर्व त्रिवेणी संगम देखने को मिला। कार्यक्रमों में माँ काली की भव्य शोभायात्रा, समुद्र पर पुल बांधना (सेतु बंध) और अंगद-रावण संवाद की लीलाओं का मंचन व सजीव झांकियों का प्रदर्शन किया गया, जिसे देख उपस्थित जनसैलाब भाव-विभोर हो उठा। महोत्सव का शुभारंभ श्री गंगा मन्दिर, छोटी होली, खुरजा से माँ काली की अत्यंत भव्य और अलौकिक शोभायात्रा के साथ हुआ। काली माता के विहंगम स्वरूप, अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित रूप और तांडव मुद्रा ने उपस्थित भक्तों के भीतर दैवीय शक्ति का संचार कर दिया। माँ काली की यह लीला केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन में छिपे काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे असुरों का विनाश कर आत्मिक शुद्धि का संदेश देती है। जगज्जननी का यह रूप इस बात का प्रतीक है कि जब संसार में अन्याय की अति होती है, तब माँ भगवती स्वयं भक्तों की रक्षा और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अवतरित होती हैं।

रामलीला के अगले चरण में वानर सेना द्वारा समुद्र पर सेतु निर्माण की लीला का जीवंत मंचन हुआ। ‘श्री राम’ नाम अंकित पत्थरों का पानी पर तैरना देख दर्शक जयकारों से गूंज उठे। सेतु बंध’ की यह लीला जीवन के गहन दर्शन को समझाती है। जब संपूर्ण समर्पण और अखंड ‘राम नाम’ के विश्वास के साथ कोई कार्य किया जाता है, तो भारी से भारी संकट (पत्थर) भी तैर जाते हैं और राहें आसान हो जाती हैं। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि असंभव दिखने वाले लक्ष्यों को भी सामूहिक पुरुषार्थ, अटूट श्रद्धा और प्रभु पर विश्वास से प्राप्त किया जा सकता है।अंगद-रावण संवाद (अखंड निष्ठा और ज्ञान-अहंकार की जंग) उत्सव के अंत में बहुप्रतीक्षित ‘अंगद-रावण संवाद’ का मंचन हुआ। अंगद द्वारा रावण की सभा में अपना पैर जमाना और रावण के तमाम योद्धाओं सहित स्वयं रावण के भी उसे हिला न पाने का दृश्य अद्भुत रहा।आध्यात्मिक संदेश: अंगद का पैर केवल शारीरिक बल का प्रतीक नहीं था, बल्कि वह “सत्य, धर्म और प्रभु श्री राम के प्रति अखंड विश्वास” का प्रतीक था। जिस प्रकार कोई भी अधर्मी अंगद के पैर को टस से मस नहीं कर सका, उसी प्रकार जो मनुष्य धर्म और ईश्वर के मार्ग पर अडिग रहता है, उसे मायावी संसार की कोई भी आसुरी शक्ति विचलित नहीं कर सकती। यह संवाद अहंकारी बुद्धि (रावण) और समर्पित ज्ञान (अंगद) के बीच का अद्भुत आत्मिक संवाद है। श्री रामलीला कमेटी (रजि.) के प्रधान आशीष गोयल और महामंत्री पुनीत साहनी विक्की ने संयुक्त रूप से बताया कि खुरजा की रामलीला न केवल मनोरंजन है, बल्कि हमारी युवा पीढ़ी को संस्कारों और अध्यात्म से जोड़ने का एक महापर्व है। इस अवसर पर सचिन बंसल और जनरल मैनेजर दीपक गर्ग इंचार्ज वासुदेव शर्मा, संयोजक मंडल के रमाकांत शर्मा, ब्रजेश प्रजापति, अनिल सैनी, हिमांशु वशिष्ठ सहित पूरी रामलीला कमेटी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में जुटी रही। मीडिया प्रचार सोशल मीडिया प्रभारी विनीत आर्य और प्रिंट मीडिया प्रभारी रविकांत भारद्वाज द्वारा इस अलौकिक उत्सव की झांकियों को जन-जन तक पहुँचाया गया।

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