सिकंद्राबाद। ।भारत पुष्प। रामबाडा़ में चल रही रामलीला में भगवान श्री राम ने अंगद को शांति दूत बनाकर लंका में लंकापति के सम्मुख प्रस्ताव भेजा ओर अंगद ने पैर जमाया ओर समुद्र पर पैर सेतू बनाया ओर सारी सेना लंका क्षेत्र में जा धमकी यहाँ तक की लीला मंचन किया गया। रामायण में लिखे अनुसार बताया जाता है की जब राम भक्त हनुमान लंका दहन कर माता जानकी का हाल भगवान श्री राम को सुनाया तो उसके बाद भगवान राम ने युद्ध ना करने ओर माता जानकी को वापस लौटाने के लिए लंकापति रावण के पास एक शांति प्रस्ताव अंगद द्वारा भेजा अंगद द्वारा लाख समझाने की कोशिश नाकाम रही ओर रावण अपनी हठधर्मी पर अडा़ रहा तभी अंगद ने अपना पैर रावण के भरे दरबार में जमा दिया ओर पैर उखाड़ने की चेतावनी दे डाली इस चेतावनी पर रावण के कहने पर दरबार में सभी महावीर योद्वाओं ने अंगद का पैर उखाड़ने की भरपूर कोशिश की मगर नाकाम रहे तो रावण खुद पैर उखाड़ने को चला तो अंगद ने अपना पैर खुद उखाड़ने हुआ कहा की मेरे पैर नहीं भगवान श्री राम के पैर पडो़ वो ही तुम्हारा उद्वार करेंगे फिर भी रावण नहीं माना ओर अपनी हठधर्मी पर डटा रहा।

अंगद की इस बात को सुनकर भगवान श्री राम समझ गये की वह हठधर्मी रावण मानेगा इसलिए समुद्र पार करने पर मंथन किया ओर समुद्र किनारे जाकर समुद्र जी पूजा अर्चना कर रास्ता मांगा था रास्ता नहीं मिलने पर भगवान श्री राम क्रोधित हो उठे ओर समुद्र को सुखाने के लिए धनुष बाण उठा लिया इतने ही समुद्र महाराज प्रकट हो गये ओर अनुय वियन करने लगे ओर बताया की आपकी सेना में नल-नील नाम के 2 योद्वा है उनके हाथों से राम नाम लिखकर समुद्र में डाले जाये तो वो पत्थर डुबेगें नहीं वो तैरते रहेगें ओर आपका पुल बन जायेगा ओर आपकी सेना समुद्र पार हो जायेगी। यह सबकुछ सुनकर भगवान श्री राम की आज्ञा से सुग्रीव ने समुद्र पर नल नील द्वारा पुल तैयार करा दिया ओर सारी सैना समुद्र पार हो गयी, सेना समुद्र पार होने की भनक जब रावण को लगी तो रावण ने सोची की मेरा मुक्तीदाता आ चुका है ओर युद्ध की तैयारी करनी चाहिए यहाँ तक की लीला का मंचन आदर्श लीला मंडली वृदावन द्वारा किया गया। इस मौके पर रामलीला समिति के प्रबंधक राहुल गुप्ता, जगदीश बजाज, लोकेश कौशल, राकेश मोहन मौनी मोजूद रहे।

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