।।भारत पुष्प/पवन शर्मा। बता दे हमारे भारत देश में सबसे प्राचीन शुद्ध व सस्ती मिठाई गुड़ होती थी इस कुदरती मिठाई को तैयार करने में काफी मेहनत मस्कक करती पड़ती हैं। इसकी शुरुआत गन्ना की पैदावार से होती हैं जब गन्ना पककर बड़ा हो जाता है तो किसान उसको काटकर क्रेशर यानी देशी भाषा में कोल्हू पर ले जाकर उसका रस यानी जूस निकलवाकर गर्म भट्टी में कढा़ईयों में पकाकर सफाई यानी फिल्टर शुद्व कराकर गुड़ की चासनी बना लेता है ओर उसके बाद ठंडा होने पर उसको विभिन्न वजन की मात्रा में रुप देकर गुड़ शक्कर तैयार करता है ओर बाजार में लाकर बेचता है जिसको हम लोग पूजा-पाठ के अलावा खाने में इस्तेमाल करते हैं ओर इससे विभिन्न प्रकार की मिठाईयां भी तैयार की जाती है जैसे गज़क, रेवडी़ कडा़के, तिंलबुंगा के अलावा दवाइयों में प्रयोग किया जाता है।

गुड़ बनाने कारीगर आसिफ मुजफ्फरनगर ने बताया की भारतीय मिठाई बनाने की विधी इस प्रकार से है की सबसे पहले किसान गन्ना की खेती कर उसकी कटाई कर कोल्हू पर लाता है ओर उसके बाद गन्ना का रस कोल्हू मशीन द्वारा निकाला जाता है ओर अब से लगभग 50 वर्ष  पूर्व गोंवश के बैल की जोडी द्वारा घुमाकर कोल्हू चलाया जाता था जिसमें रस निकालने में काफी मेहनत होती थी काफी देर में रस निकलता था मगर अब मशीनरी युग में इंजन व बिजली मोटर से कोल्हू चलाकर फटाफट गन्ने का रस निकालकर भट्टी में कढा़ईयों में पकाकर काफी मात्रा में जल्द से जल्द गुड़ बनकर तैयार हो जाता है।

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