अनूपशहर ।भारत पुष्प। शुक्रवार को डीपीबीएस कॉलेज में प्राचार्य जीके सिंह के निर्देशन में वाणिज्य विभाग, बीसीए विभाग, बीएड विभाग और रोवर- रेंजर के संयुक्त तत्वावधान में देश के महान स्वाधीनता सेनानी, देश के प्रथम राष्ट्रपति, संविधान सभा के अध्यक्ष, ‘भारत रत्नडॉ. राजेंद्र प्रसाद की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो० जीके सिंह ने कहा कि सालों की गुलामी और आजादी की लड़ाई के बाद हमें जो राष्ट्र मिला उसकी कमान का एक सिरा पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू तो दूसरा सिरा राजेंद्र प्रसाद के पास था। उन्होंने नव स्वतंत्र राष्ट्र को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख नेता थे और उन्हें सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण के लिए जाना जाता था। रोवर रेंजर अधिकारी डॉ० तरुण श्रीवास्तव ने कहा कि डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने 1914 में बंगाल और बिहार की भीषण बाढ़ के दौरान, उन्होंने राहत कार्यों में मदद करने के लिए स्वयं सेवा की। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पीड़ितों को भोजन और कपड़े प्रदान किए। 15 जनवरी, 1934 को जब बिहार में भूकंप आया तो राजेंद्र प्रसाद जेल में थे। 17 जनवरी को उन्होंने बिहार सेंट्रल रिलीफ कमेटी बनाकर धन जुटाने का काम अपने ऊपर ले लिया।
वह राहत कोष संग्रह के प्रभारी थे, जिसकी कुल राशि 38 लाख रुपये से अधिक थी। क्वेटा भूकंप के दौरान, उन्होंने ब्रिटिशों द्वारा उन्हें इस क्षेत्र से बाहर जाने से रोकने के प्रयासों के बावजूद, पंजाब में क्वेटा सेंट्रल रिलीफ कमेटी की स्थापना की। रोजगार सीमिति के समन्वयक डॉ० पंकज गुप्ता ने कहाकि डॉ० राजेंद्र प्रसाद सबसे लंबे समय, 12 वर्षों तक भारत के राष्ट्रपति रहे. 25 जनवरी, 1960 की रात को उनकी बड़ी बहन भगवती देवी का निधन हो गया. जब वो सिर्फ़ 19 वर्ष की थी तभी उनके पति का निधन हो गया था. तब से वो अपने छोटे भाई राजेंद्र प्रसाद के साथ रह रही थीं. कुछ घंटे पहले हुई उनकी प्रिय बहन की मौत के बावजूद राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी की सुबह गणतंत्र दिवस परेड की सलामी ली. परेड से लौटने के बाद उन्होंने अपनी बहन के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। बीएड से डॉ वीरेंद्र सिंह ने कहा कि जब राजेंद्र प्रसाद राष्ट्पति बने तो उस समय राष्ट्रपति का वेतन दस हज़ार रुपए प्रति माह हुआ करता था. उन्होंने शुरू से ही उसका आधा यानी सिर्फ़ 5000 रुपए वेतन लिया. बाद में उन्होंने उसको भी घटाकर सिर्फ़ 2500 रुपए प्रति माह कर दिया था। डॉ केसी गौड़ ने कहा कि जब आज़ादी से पहले 2 सितंबर, 1946 को अंतरिम सरकार बनी तो जवाहरलाल नेहरू ने राजेंद्र प्रसाद को खाद्य और कृषि मंत्री के रूप में अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। साल का अंत होते होते नेहरू ने महात्मा गांधी और सरदार पटेल की सलाह पर कांग्रेस अध्यक्ष की हैसियत से डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का अध्यक्ष बनाने का फ़ैसला किया। इस अवसर पर डॉ राजीव गोयल,डॉ विशाल शर्मा, किश्वर कुमारी, डॉ शैलेन्द्र सिंह, पंकज प्रकाश, , डॉ सुधा उपाध्याय, डॉ सुनीता गौड़, कर्मचारी और छात्र- छात्राये उपस्थित रहे।
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