खुर्जा। ।भारत पुष्प। स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ कार्यालय पर स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। सह जिला संघचालक अनिल ने ध्वजारोहण करने के पश्चात बताया कि आज हम सभी 79वां स्वतंत्रता दिवस बनाने के लिए एकत्रित हुए है। हम सभी के हृदय में गर्व और आनंद का अवसर है। 15 अगस्त का यह पावन दिन हमें याद दिलाता है उन असंख्य बलिदानियों की, जिन्होंने हँसते-हँसते अपना जीवन मातृभूमि के चरणों में अर्पित कर दिया। यह स्वतंत्रता हमें यूँ ही नहीं मिली—इसके पीछे अनगिनत आहुतियाँ और त्याग की गाथाएँ हैं। स्वतंत्रता का अर्थ केवल अंग्रेज़ी शासन से मुक्ति नहीं है। डॉ. हेडगेवार जी कहा करते थे—”राजनीतिक स्वतंत्रता का महत्व तभी है जब वह राष्ट्र के आत्मा, संस्कृति और स्वत्व की रक्षा करे।” यदि हमारी भाषा, संस्कृति, परंपरा, और राष्ट्रभावना सुरक्षित नहीं है, तो स्वतंत्रता अधूरी है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना ही इस भावना के लिए हुई कि राष्ट्र को एकात्म और सशक्त बनाया जाए।संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ज़ी ने असहयोग आंदोलन (1921) और नमक सत्याग्रह (1930) में सक्रिय भागीदारी की थी, और इन्हीं आंदोलनों के चलते वे दो बार जेल भी गए थे।1954 में दादरा और नगर हवेली की पुर्तगाली शासन से मुक्ति और गोवा मुक्ति आंदोलन (1961) में संघ के स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका रही। समाज में संगठन, अनुशासन और चरित्र निर्माण के माध्यम से उन्होंने जनजागरण का कार्य किया।आज भी संघ सेवा, संस्कार और संगठन के माध्यम से राष्ट्र को मजबूत कर रहा है।स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत और त्याग पर जोर दिया, साथ ही भारत को ‘विश्वगुरु’ के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता बताई। भागवत ज़ी ने कहा कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज धर्म का प्रतीक है, जो सबको साथ लेकर चलता है और विश्व को समाधान प्रदान करने का दायित्व भारत का है।जब तक हम अखंड भारत के सपने को साकार नहीं कर लेते, हमारी यात्रा अधूरी है। इस मौके पर कहा गया कि आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम प्रतिज्ञा लें—”हम जीएँगे तो भारत के लिए, और आवश्यकता पड़ी तो मरेंगे भी भारत के लिए। “कार्यक्रम मे सरवचन विभाग सेवा प्रमुख, लोकेश जिला प्रचार प्रमुख सुदर्शन नगर कार्यवाह समस्त स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
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