ॐ राधावल्लभाय हरिवंशप्रियाय रसिकेश्वराय नमो नमः॥–––आचार्य नवल किशोर जी महाराज

खुर्जा। ।भारत पुष्प। श्री गोपाल संकीर्तन के 39 वें वार्षिक उत्सव के अवसर पर निष्काम भक्ति ज्ञान यज्ञ के रूप में तीसरे  दिन की दिव्य मानस कथा में कथा प्रवर आचार्य नवल किशोर जी महाराज ने बताया कि भक्ति उत्पन्न कैसे होती है जैसे कि ईश्वर के प्रति गहरे प्रेम, विश्वास और समर्पण से उत्पन्न होती है, और यह सहज रूप से तब आती है जब व्यक्ति निस्वार्थ भाव से सभी प्राणियों से प्रेम करता है, नियमित प्रार्थना और ध्यान करता है, और गुरु के मार्गदर्शन में शास्त्रों का पालन करते हुए दूसरों की सेवा करता है, जिससे मन में श्रद्धा और फिर भाव जागृत होता है। आचार्य नवल किशोर जी महाराज ने बताया कि ईश्वर से सच्चा, अटूट और निःस्वार्थ प्रेम ही भक्ति है; यह किसी दिखावे या सांसारिक लालसा से रहित होती है, और शास्त्रों में बताई गई प्रक्रिया के अनुसार, श्रद्धा से साधु-संगति, भजन, निष्ठा, रुचि, आसक्ति और फिर ‘भाव’ (गहरा लगाव) उत्पन्न होता है, जिससे प्रेम मिलता है। उन्होनें भावार्थ देते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत में वर्णित भक्ति के नौ रूप हैं; इन्हें “नवधा भक्ति” के नाम से जाना जाता है। वे हैं 1) श्रवणम, 2) कीर्तनम, 3) स्मरणम, 4) पादसेवनम, 5) अर्चनम, 6) वंदनम, 7) दास्यम, 8) सख्यम और 9) आत्मनिवेदन। प्रवचन को विराम करते हुए बताया कि गोकुल और वृंदावन एक ही नहीं हैं, बल्कि ये दोनों अलग-अलग स्थान हैं जो भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़े हैं; गोकुल वह जगह है जहाँ कृष्ण ने बचपन बिताया और उनका पालन-पोषण हुआ, जबकि वृंदावन वह स्थान है जहाँ उन्होंने राधा और गोपियों के साथ रासलीला की, हालांकि दोनों ही ब्रज क्षेत्र में हैं और अक्सर एक साथ यात्रा की जाती हैं। कथा में मंडल के समर्पित कार्यकर्ता मीडिया प्रभारी जयभगवान शर्मा रजत अग्रवाल जगदीश चंद्र बैंक वाले, कौशल शर्मा, राजेश पचौरी, विनय वर्मा, मोहित मित्तल, जय भगवान अग्रवाल, दिनेश प्रदीप, ठाकुर दुष्यंत सिंह, सौरभ बंसल, रजत अग्रवाल, अरुण बंसल, अवनेश बंसल, नीलिमा बंसल, रानी पचौरी, मंजू अग्रवाल, ललिता अग्रवाल, विपिन अग्रवाल, डा0आरसी वर्मा, मनोज अग्रवाल, केके बंसल, संजीव अग्रवाल आदि का सहयोग रहा ।

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