खुर्जा (भारत पुष्प) भारतीय ज्ञान परंपरा जीवन के हर क्षेत्र से संपन्न है। यहां की भूमि में वेदों का ज्ञान प्रकट हुआ है वेदों से लेकर ब्राह्मण दर्शन उपनिषद तक ज्ञान विज्ञान फैला हुआ है। जिसे अपना कर भारत सशक्त समर्थ राष्ट्र बन सकता है। यह बात एम.एम.एच. कालेज, गाजियाबाद की प्रो. सीमा कोहली ने महाविद्यालय में आयोजित डाॅ. पदमा उपाध्याय अंत-र्विश्वविद्यालयीय वाद-विवाद प्रतियोगिता के दौरान कही।प्रतियोगिता में विभिन्न विश्वविद्यालयों के महाविद्यालयों से कुल 10 टीमों के प्रतिभागियों ने विषय के पक्ष एवं विपक्ष में अपने विचार रखे। एकेपी डिग्री कालेज में डाॅ. पदमा उपाध्याय अंतर्विश्वविद्यालयीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में ‘‘भारत को विश्व गुरू बनाने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनसर््थापित करना आवश्यक है’’ विषय पर अपने पक्ष एवं विपक्ष में तर्क प्रस्तुत करने का। इससे पूर्व प्रतियोगिता का शुभारंभ प्रो. सीमा कोहली, एमएमएच कालेज, गाजियाबाद, डाॅ. सन्ध्या द्विवेदी एमकेबीवी पीजी कालेज फिरोजाबाद, डा पीयूष त्रिपाठी, डीएन पीजी कालेज गुलावटी, व महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. डिम्पल विज ने वेदमंत्रोच्चारण के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की संयोजिका एकता चैहान ने बताया कि इस प्रतियोगिता का आयोजन प्रत्येक वर्ष महाविद्यालय की प्रथम प्राचार्या डाॅ. पद्मा उपाध्याय की स्मृति में कराया जाता है। प्रतियोगिता के दौरान निर्णायक डाॅ सन्ध्या द्विवेदी ने कहा कि प्रकृति और मनुष्य के संबंधों में सकारात्मक सामंजस्य रखते हुए विकास करना भारतीय दर्शन की मूल विशेषता रही है। भारतीय दर्शन में संपूर्ण पृथ्वी को एक परिवार माना जाता है और सभी के सुखी रहने की कामना की जाती है । इस ज्ञान परंपरा को अपनाने से वर्तमान की समस्त समस्याओं यथा- भ्रष्टाचार, अत्याचार, चोरी, छल -कपट, प्रकृति का अत्यधिक दोहन, असमय मृत्यु आदि का स्वतः समाधान हो जाएगा। वहीं अन्य निर्णायक डाॅ. पीयूष त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा व्यक्ति को स्वत्व का बोध कराती है। साथ ही मनुष्य को एक साथ चलने, एक स्वर में बोलने और एक दूसरे के मन को जानने का संदेश देती है क्योंकि एक विचारधारा वाला समाज ही उन्नति कर सकता है।कालेज की प्राचार्या प्रो. डिम्पल विज ने कहा कि पूरे इतिहास में हमारी संकृति अनेकों आक्रमणों के बावजूद गर्व के साथ विकसित हुई है। इसका कारण वैदिक मूल्य और प्राचीन ज्ञान परंपरा है। आपने कहा कि यहां के घर-घर में आयुर्वेद के सिद्धांत जीवित हैं प्लास्टिक सर्जरी हो या वायुयान, भौतिकी हो या रसायन, प्रबंधन हो या नक्षत्र विज्ञान प्रत्येक क्षेत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा अपने उन्नत रूप में स्थित है । जिसे हमने भुला दिया आज उसे पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है। आपने समस्त प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का संदेश दिया। प्रतियोगिता के अंत में प्रथम स्थान धर्मेन्द्र शर्मा चैधरी हरचन्द सिंह महाविद्यालय तथा दीपांशी आईपी कालेज को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया , द्वितीय स्थान संध्या एकेपी कालेज खुर्जा तथा दिव्या डीएबी कालेज बुलन्दशहर ने भी संयुक्त रूप से हासिल किया। तृतीय स्थान हेमलता डीएस कालेज अलीगढ़ को मिला। इनके अलावा सांत्वना पुरस्कार खुशी एकेपी कालेज खुर्जा तथा सोनिया ब्रह्मानन्द महिला महाविद्यालय को मिला। वहीं महाविद्यालय की चल वैजयन्ति पर चैधरी हरचन्द सिंह कालेज, शाहपुर ने कब्जा जमाया। कार्यक्रम का कुशलतापूर्वक संचालन सह संयोजिका डाॅ. स्वर्णाली दे ने किया। महाविद्यालय की वरिष्ठ प्राध्यापिका नीलू सिंह ने सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर कालेज की समस्त शिक्षिकाएं, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं छात्राएं मौजूद रहीं।
![]()
