बिहार। ।भारत पुष्प। वीर स्वतंत्रता सेनानी रामफल मंडल को आधिकारिक रूप से “शहीद” का दर्जा दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। अखिल भारतीय धानुक एकता महासंघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं राष्ट्रीय कला एवं संस्कृति मंत्री तथा फिल्मकार एन. मंडल ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक औपचारिक निवेदन-पत्र भेजकर 23 अगस्त 2026 (शहीद दिवस) तक रामफल मंडल को आधिकारिक रूप से “शहीद” का दर्जा प्रदान करने का अनुरोध किया है। 21 जुलाई 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि रामफल मंडल ने भारत की आज़ादी के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनके अमूल्य योगदान को सम्मानित करना केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। पत्र में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस पूर्व सार्वजनिक वक्तव्य का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “जिन्होंने अंग्रेजों के परचम के विरुद्ध लड़ाई लड़ी, उनका नाम रामफल मंडल था।” इसी आधार पर महासंघ ने मुख्यमंत्री से अपने संकल्प को पूरा करते हुए आवश्यक प्रशासनिक एवं विधिक प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराने की अपील की है। फिल्मकार एन. मंडल ने इस संबंध में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी पत्र साझा करते हुए लिखा कि बिहार सरकार स्वतंत्रता संग्राम में रामफल मंडल के योगदान का सम्मान करते हुए संवेदनशीलता के साथ इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि 23 अगस्त 2026 (शहीद दिवस) तक रामफल मंडल को आधिकारिक रूप से “शहीद” का दर्जा दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। एन. मंडल ने अपने संदेश में कहा कि यह केवल एक व्यक्ति को सम्मान देने का विषय नहीं, बल्कि देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले एक वीर स्वतंत्रता सेनानी के बलिदान को उचित पहचान दिलाने का प्रयास है। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी से आग्रह किया गया है कि बिहार के वीर स्वतंत्रता सेनानी रामफल मंडल जी को 23 अगस्त 2026 (शहीद दिवस) तक आधिकारिक रूप से ‘शहीद’ का दर्जा प्रदान किए जाने हेतु निवेदन-पत्र प्रेषित किया गया है। हमें विश्वास है कि बिहार सरकार इस विषय पर संवेदनशीलतापूर्वक विचार करेगी तथा स्वतंत्रता संग्राम में रामफल मंडल जी के योगदान को उचित सम्मान दिलाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगी।” यह मांग अब सामाजिक संगठनों और रामफल मंडल के सम्मान में विश्वास रखने वाले लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। सभी की निगाहें अब बिहार सरकार के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।
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