-शिवाजीनगर में मैथिली साहित्यकारों ने किया रचनापाठ, गांव और साहित्य के बीच बना सीधा संवाद
शिवाजीनगर (समस्तीपुर)। ।भारत पुष्प। साहित्य अकादेमी, भारत सरकार एवं गाम घर के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को प्रखंड विकास भवन, शिवाजीनगर में ‘ग्रामलोक’ साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मैथिली के साहित्यकारों को मिथिला पेंटिंग पाग और चादर से सम्मानित किया गया। प्रखंड प्रमुख डॉ. गोविंद कुमार, अंचलाधिकारी अम्पाली कुमारी, संयोजक एन. मंडल और साहित्यकारों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता गाम घर के संरक्षक गोविन्द कुमार ने की, जबकि कार्यक्रम के समन्वयक एन. मंडल रहे। कार्यक्रम में मैथिली के छह रचनाकारों अनिरुद्ध झा दिवाकर, साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित अमित कुमार मिश्रा, शेफालिका, राम स्वरूप साहनी ‘रोसडाई’, आशा कुमारी एवं वंदना चौधरी ने अपनी कविताओं एवं रचनाओं का पाठ किया। गाम घर की ओर से आयोजित ‘ग्रामलोक’ का विशेष उद्देश्य साहित्यिक गतिविधियों को शहरों और पारंपरिक साहित्यिक मंचों से आगे ग्रामीण क्षेत्रों तक ले जाना रहा। गाम घर के माध्यम से गांव के परिवेश, लोकजीवन, भाषा, संस्कृति, साहित्य और आम लोगों के अनुभवों को रचनात्मक संवाद का हिस्सा बनाने की पहल की जा रही है। आयोजकों के अनुसार, गाम घर केवल एकसंस्था का नाम नहीं, बल्कि गांव की सामाजिक-सांस्कृतिक स्मृतियों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों को सामने लाने का एक प्रयास है। साहित्य अकादेमी भारत सरकार ‘ग्रामलोक’ इसी सोच का विस्तार है, जिसमें रचनाकार गांव में पहुंचकर पाठकों से मिलते हैं और ग्रामीण समाज भी साहित्यिक संवाद में सीधे भागीदारी करता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर गोविन्द कुमार ने कहा कि साहित्य का संबंध समाज के हर वर्ग से है और उसे केवल शहरों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। गांवों में साहित्य और संस्कृति की अपनी समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि ‘ग्रामलोक’ जैसे आयोजन साहित्य और ग्रामीण समाज के बीच संवाद को मजबूत करता हैं। उन्होंने गाम घर की गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण परिवेश को केंद्र में रखकर भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है। ऐसे प्रयासों से स्थानीय पाठकों और नई पीढ़ी में साहित्य के प्रति रुचि विकसित हो सकती है। अनिरुद्ध झा दिवाकर ने शारदे वंदना गा कर माहौल को भक्तिमय कर दिये। अमित कुमार मिश्रा ने मजदूर, अघोड़ी, अपरिमेय संख्या शीर्षक से अपनी रचना प्रस्तुत की। उनकी कविता ‘दू बखत केर रोटी लेल मजबूर छी’ को लोगों ने खूब सराहा। कवियत्री शेफालिका ने जब हास्य गीत ‘सेल्फी बाली कनिया’ की प्रस्तुति दी दो सभागर ठहक एवं तालियों से भर गया। राम स्वरूप साहनी ‘रोसडाई’ ने जब ‘पहुना अहाँ गाम चलि आबू’ का पाठ किए तो सभागर मे विरहिणी पत्नी की व्यथा एवं सावन दोनो एक साथ उपस्थित हो उठा। आशा कुमारी ने अपनी ‘हम उर्मिला छी’ कविता से नारी सशक्तिकरण को उजागर किया। वंदना चौधरी ने ‘भेल मानव इच्छा धारी’ के माध्यम से समाज में हो रहे नैतिक पतन को रेखांकित किया। कार्यक्रम के समन्वयक सह गाम घर संस्थापक फिल्मकार एन. मंडल ने अपनी कविता ‘गाम घर’ का भी पाठ किया। कविता में गांव, मिट्टी, लोकजीवन और अपनी जड़ों से जुड़े भावों को अभिव्यक्ति दी गई। एन. मंडल ने कहा कि ‘ग्रामलोक’ का विचार साहित्य को गांव तक ले जाने और गांव की आवाज को साहित्य के मंच तक पहुंचाने से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि गाम घर के माध्यम से ग्रामीण जीवन और लोकसंस्कृति से जुड़े विषयों पर निरंतर रचनात्मक गतिविधियां आयोजित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल पुस्तकों में पढ़े जाने वाली चीज नहीं, बल्कि समाज से संवाद करने का माध्यम भी है। इसलिए जरूरी है कि रचनाकार और पाठक एक-दूसरे के करीब आएं और गांवों में भी साहित्यिक संवाद का वातावरण बने। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण क्षेत्र के साहित्यप्रेमियों और स्थानीय पाठकों ने रचनाकारों की प्रस्तुतियां सुनीं तथा मैथिली भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े विषयों पर संवाद किया। कार्यक्रम में ग्रामीण परिवेश में साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और नई पीढ़ी को अपनी भाषा एवं संस्कृति से जोड़ने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
![]()
