खुर्जा l ।भारत पुष्प। प्रदेश में मिठाइयों पर उपयोग की अंतिम तारीख प्रदर्शित करने की व्यवस्था लागू होने के बाद कुछ दुकानों पर इसका असर दिखने लगा है। मिठाइयों की ट्रे के साथ निर्माण और इस्तेमाल की अवधि बताने वाले टैग लगाए जा रहे हैं। इससे ग्राहकों को खरीदारी से पहले यह जानने में मदद मिलेगी कि मिठाई का सेवन कब तक करना उचित होगा। हालांकि, शुरुआती पड़ताल में सभी दुकानों पर समान रूप से व्यवस्था लागू नहीं मिली है। कुछ दुकानदार अभी टैग तैयार करने की बात कह रही है l खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के निर्देश के अनुसार, प्रदेश में 15 अक्टूबर से बिक्री के लिए प्रदर्शित और भंडारित मिठाइयों पर ‘यूज बाय डेट’ यानी उपयोग की अंतिम तिथि दिखाना अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था खुली मिठाइयों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। अब ग्राहक काउंटर पर रखी मिठाई चुनते समय उसकी उपयोग अवधि की जानकारी भी देख सकेगा। विभाग की आयुक्त रोशन जैकब की ओर से जारी निर्देशों का उद्देश्य खरीदारों को खाद्य पदार्थों के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है। लखनऊ की तीन दुकानों की सीमित पड़ताल में अनुपालन की अलग-अलग स्थिति सामने आई। दो दुकानों पर मिठाइयों के साथ तारीख बताने वाले टैग नहीं मिले। पूछने पर दुकानदारों ने बताया कि टैग का ऑर्डर दिया गया है और जल्द लगा दिए जाएंगे। तीसरी दुकान पर निर्माण तिथि और ‘बेस्ट बिफोर’ की जानकारी प्रदर्शित मिली। वहां दुकानदारों ने व्यवस्था को ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने वाला कदम बताया। उनका कहना था कि स्पष्ट जानकारी देने से कारोबार को भी लाभ होगा। इस सीमित पड़ताल से पूरे प्रदेश की स्थिति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। त्योहारी खरीदारी के दौरान इस जानकारी का व्यावहारिक महत्व है। कई लोग मिठाई तुरंत खाने के लिए खरीदते हैं, जबकि कुछ परिवार उपहार देने या दूसरे शहर भेजने के लिए खरीदारी करते हैं। इस्तेमाल की अंतिम तारीख सामने होने से ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार उत्पाद चुन सकता है। उदाहरण के लिए, अगले दिन किसी को मिठाई देनी हो तो खरीदार पहले ही पूछ सकता है कि उसे कितने समय तक और किन परिस्थितियों में रखा जा सकता है। तारीख का स्पष्ट प्रदर्शन खरीदारी के समय होने वाली इस बातचीत को आसान बनाता है। हर मिठाई की उपयोग अवधि एक जैसी नहीं होती। प्रदेश से संबंधित निर्देशों की जानकारी के मुताबिक, अलग-अलग मिठाइयों की अवधि एक दिन से लगभग 30 दिन तक हो सकती है। इसलिए किसी एक उत्पाद की अवधि देखकर दूसरी मिठाई के बारे में अनुमान लगाना सही नहीं होगा। दूध, खोया, छेना, घी, आटा और मेवों से तैयार उत्पादों की प्रकृति अलग होती है। खरीदार को उसी मिठाई की तारीख देखनी चाहिए, जिसे वह खरीद रहा है। दुकानदार से उसकी भंडारण संबंधी जानकारी भी पूछी जा सकती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की मार्गदर्शिका भी मिठाइयों की सीमित उपयोग अवधि और स्वच्छता के महत्व पर जोर देती है। इसमें उदाहरण के तौर पर कलाकंद को उसी दिन खाने और रसगुल्ला तथा रसमलाई जैसे कुछ उत्पादों को प्रशीतन में रखकर कम अवधि में इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। ये उदाहरण बताते हैं कि मिठाई के प्रकार के साथ उसे रखने की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण हैं। मार्गदर्शिका में दी गई अवधि को हर दुकान के हर उत्पाद के लिए एक समान गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। ग्राहकों के लिए तारीख के साथ दुकान की साफ-सफाई और मिठाई के रखरखाव पर ध्यान देना भी जरूरी है। खाद्य सुरक्षा संबंधी मार्गदर्शन में निर्माण, बिक्री और भंडारण के दौरान स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी बताई गई है। मिठाइयों को तैयार करने में इस्तेमाल सामग्री और उत्पाद की प्रकृति के अनुसार ही उनकी अवधि निर्धारित होनी चाहिए। केवल आकर्षक सजावट या पैकिंग के आधार पर ताजगी का अनुमान लगाने के बजाय उपलब्ध जानकारी पढ़ना बेहतर है। नई व्यवस्था का पूरा लाभ तभी मिलेगा, जब तारीख साफ दिखाई दे और संबंधित मिठाई से उसका संबंध स्पष्ट हो। जिन दुकानों ने टैग लगा दिए हैं, वहां ग्राहकों को खरीदने से पहले जानकारी मिल रही है। जहां तैयारी बाकी है, वहां अनुपालन सुनिश्चित करना जरूरी होगा। फिलहाल शुरुआती तस्वीर में सुधार की शुरुआत के साथ कुछ कमियां भी सामने आई हैं।

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