अनूपशहर। ।भारत पुष्प। डीपीबीएस महाविद्यालय में शुक्रवार को दो दिवसीय “द फ्यूचर ऑफ़ एजुकेशन इन इंडिया” सेमिनार का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि जेपी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर राजीव सक्सेना, रजिस्टार संजय अग्रवाल, मुस्लिम विश्वविद्यालय अलीगढ़ से प्रोफेसर लारी आज़ाद, मेरठ से आरजी कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर निवेदिता मलिक, डॉ राहुल कुमार, डॉ नूर आलम अलीगढ़, प्रोफेसर युके झा, प्रो पीके त्यागी, प्राचार्य प्रोफेसर गिरीश कुमार सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया । सर्वप्रथम सहायक सचिव डॉ तरुण श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय सेमिनार भारत मे शिक्षा का भविष्य के प्रस्तावना व उद्देश्य के बारे में जानकारी प्रदान की। तत्पश्चात प्रोफेसर लारी आजाद ने उपरोक्त विषय पर कहा कि भारत के विकास में शिक्षा की अहम भूमिका रही है किसी भी व्यक्ति को आकार देने और उसे एक ज्ञानवान नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने दो प्रकार की शिक्षा पद्धति के बारे में बतया पाश्चात्य शिक्षा परंपरा जो कि पूर्णरूप से विशुद्ध है दूसरी शिक्षा परंपरा भारतीय सनातन शिक्षा। साथ ही उन्होंने कहा “आओ लौट चलें अपनी सनातनी शिक्षा की ओर”। मेरठ से आरजी कॉलेज की प्राचार्या, प्रोफेसर निवेदिता मालिक ने बताया कि हाल के वर्षों में भारत ने शैक्षिक प्रौद्योगिकी प्रणाली में समाधानों के आगमन के साथ शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव देखा है। कोविड-19 माहमारी ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है तथा स्कूल व कॉलेज डिजिटल लर्निंग टूल को तेजी से अपना रहे हैं सेमीमार के मुख्य अतिथि जेपी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर राजीव सक्सेना ने अपने सम्बोधन में कहा कि प्रोधोगिकी ने हमारे सीखने सिखाने में क्रांति ला दी है । डिजिटल उपकरणों की मदद से छात्र अपनी गति से सीख सकते हैं और शिक्षक वास्तविक समय में प्रतिक्रिया दे सकते हैं। आज के भविष्य में शिक्षा प्रणाली पूर्ण रूप से प्रोधोगिकी आधारित रचने वाली है। यह कक्षा में सहभागिता और सहयोग को भी बढ़ा सकती है। जिससे सिखना अधिक इंट्रेस्टेड और मज़ेदार हो जाता है। सेमिनार में प्राचार्य प्रोफेसर जीके सिंह ने अनुकूली शिक्षा पर ज़ोर देते हुए कहा कि अनुकूली शिक्षण प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप ढलकर शिक्षण अनुभव कर सकता है। इसके माध्यम से छात्रों के सीखने के पैटर्न का आकलन कर अनुकूलित शिक्षण पथ, संसाधन और आकलन प्रदान कर सकते हैं। जिससे छात्रो के सीखने में सुधार हो सकता है। टेक्निकल सेशन अध्यक्ष डॉ नूर आलम व जे पी यूनिवर्सिटी से डॉ राहुल कुमार सयुक्तरूप की इस सत्र में विभिन्न राज्यो व जनपदों से आये शिक्षविदों ने भारत मे शिक्षा का भविष्य विषय पर विचारों को सुना और सम्बन्धित विषय पर अपने विचार प्रकट करते हुए वर्तमान व भविष्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षा के क्षेत्र में सुधारात्मक कार्य पर ज़ोर देते हुए बताया कि छात्रो का रचनात्मक, प्रौद्योगिकी तथा तर्क शक्ति के विकास पर ज़ोर से देना चाहिए छात्रो के सोचने समझने की क्षमता को कैसे मज़बूत किया जाये। महाविद्यालय द्वारा आयोजित सेमिनार में देश के विभिन्न राज़्यों उत्तर प्रदेश, कश्मीर, उड़ीसा आदि के शिक्षाभाग ने प्रतिक्रिया कर भविष्य में शिक्षा प्रणाली के विषय पर विभिन्न प्रकार से अपने विचार एवं सुझाव व्यक्त कियें। इस अवसर पर सचिव प्रोफेसर पी के त्यागी, डॉ यजवेंद्र कुमार, प्रोफेसर सीमान्त दुबे, सत्यप्रकाश, डॉ विशाल शर्मा, प्रोफेसर चंद्रावती,पंकज गुप्ता, प्रोफेसर ऋषि अग्रवाल, डॉ राजीव गोयल, दीक्षित कुमार, हिमांशु कुमार आदि समस्त स्टाफ व कर्मचारी उपस्थित रहे।
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