सिकंद्राबाद। ।भारत पुष्प/पवन शर्मा। पीड़ीता पूनम के पति मुकेश नया गांव निवासी ने बताया मैने अपनी पत्नी पूनम की डिलीवरी 4 दिसंबर 24 को नगर सिकंदराबाद के सरकारी अस्पताल में करायी थी। डिलीवरी नार्मल / सामान्य होने पर चिकित्सकों के कहने पर हल्का फुल्का खाद्य पदार्थ देना शुरु करा दिया तो पीड़ीता के पेट में दर्द होने लगा तो अल्ट्रासाउंड कराने पर रिपोर्ट के अनुसार पीड़ीता की बच्चेदानी फटने व पेशाब की नली एंव आँतों को नुकसान होने की पुष्टि हुई और बताया की तभी में अपनी पत्नी पूनम को तुरंत दिल्ली के सरकारी अस्पताल मे ले गया और ईलाज के बाद मैने लापरवाह चिकित्सकों की शिकायत सी0एम0ओ, जिला अधिकारी व जिला कप्तान से की तो स्थानीय सरकारी अस्पताल के डाक्टर नाराज हो गए और मेरे पर महिला डाक्टर के साथ मारपीट के गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस द्वारा दबाब देने लगे।
इस प्रताड़ना को देख मेने हाईकोर्ट की शरण ली और याचिका दायर की तो हाईकोर्ट के न्यायमूर्ती नीरज तिवारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुनील कुमार दोहरे को लापरवाह डाक्टरों पर कार्रवाई करने का आदेश जारी किया था। हाई कोर्ट के आदेश के बाबजूद भी लापरवाह डाक्टरों के प्रति सी0एम0ओ ने कोई ठोस कार्रवाई नही की तो उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने नाराजगी जताते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए न्यायालय की अवमानना पर जबाब मांगते हुए सी0एम0ओ को 18 अगस्त 25 को तलब किया था ओर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कही थी इसी मामले ने अब नया मोड ले लिया है की हाईकोर्ट ने अब सिकंदराबाद के सरकारी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक सहित 2 महिला डाक्टरों से आठ सप्ताह के अंदर जबाब मांगा था और अगली सुनवाई 31 अक्टूबर 25 को हुईं थी और उसके बाद हाईकोर्ट ने कुछ डाक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की बात कही मगर केवल एक के खिलाफ एफ0आई0आर दर्ज कराने से नाराज़ होकर पीड़ीता के पति मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ले ली है और अगली सुनवाई 8 भी को होनी निश्चित हुईं हैं।
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