खुर्जा। ।भारत पुष्प।‘वन्दे मातरम्’ के 150 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से संबद्ध देशभर के 25,000 से अधिक विद्यालयों में ‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम के अंतर्गत एक अभूतपूर्व सामूहिक वन्दे मातरम् गायन का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर एक करोड़ से अधिक छात्र/छात्राओं, आचार्य बंधु-बहनों, अभिभावकों एवं समाज के सम्मानित जनों ने एक ही सुर, एक ही लय, एक ही ताल, एक ही समय और एक ही तिथि पर राष्ट्रवंदना में सहभागिता कर राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता का अद्भुत संदेश दिया। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत श्रीमती सावित्री देवी लक्ष्मी चंद्र सरस्वती विद्या मंदिर में भी भव्य सामूहिक वन्दे मातरम् गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति और उत्साह से ओत-प्रोत दिखाई दिया। लगभग 2,000 भैया-बहिनों एवं समाज के सामान्य जनों ने एक साथ वन्दे मातरम् का सामूहिक गायन कर इस ऐतिहासिक क्षण के सहभागी बनने का गौरव प्राप्त किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मीनाक्षी सिंह, विधायक ने सहभागिता करते हुए राष्ट्र के प्रति समर्पण, एकता और कर्तव्यबोध की भावना को सुदृढ़ करने का संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मनवीर सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष, विद्या भारती पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र ने की। वहीं मुख्य वक्ता कमल कुमार, क्षेत्रीय संयोजक, भारतीय शिक्षा समिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र ने ‘वन्दे मातरम्’ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहित सिंह चौहान ने प्रस्ताव की प्रस्तुत की,उप प्रधानाचार्य जय भगवान शर्मा ने अतिथियों का परिचय कराया। कार्यक्रम का संचालन आचार्या मीनू ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित हजारों कंठों से जब “वन्दे मातरम्” का स्वर एक साथ गूंजा, तो पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति की भावना से अभिभूत हो उठा। यह केवल सामूहिक गायन नहीं, बल्कि माँ भारती के प्रति श्रद्धा, राष्ट्र के प्रति समर्पण और भारतीय समाज की एकता का विराट उद्घोष बन गया।‘वन्दे मातरम्’ भारत की स्वतंत्रता चेतना का अमर प्रतीक रहा है। इसके 150 वर्ष पूर्ण होने का यह अवसर आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र, संस्कृति और मातृभूमि के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव है। खुर्जा के लगभग 2,000 सहभागी इस ऐतिहासिक राष्ट्रवंदना के साक्षी ही नहीं, बल्कि उसके सक्रिय सहभागी बने। एक साथ उठे इन स्वरों ने यह संदेश दिया कि भारत की शक्ति उसकी विविधताओं में निहित एकता और राष्ट्र के प्रति साझा भाव में है।
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