मानसिक तनाव और गलत खानपान से पैदा होता हाइपरटेंशन
विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित
बुलंदशहर। (भारत पुष्प) विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर पहासू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित हेल्थ एंड वेलनेश सेंटर पर विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। आयोजित स्वास्थ्य शिविर में मरीजों की जांच कर उन्हें उपचार उपलब्ध कराया गया, साथ ही लोगों को बचाव के बारे में जानकारी दी गयी। एक सामान्य व्यक्ति को 30 वर्ष की आयु के बाद नियमित अंतराल पर अपने ब्लड प्रेशर की जांच कराना चाहिए। पहासू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सभागार में शुक्रवार को विश्व उच्च रक्तचाप दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सीएचसी अधीक्षक डा. मनोज कुमार, डा. केडी राहुल सहित चीफ फार्मासिस्ट अनिल कुमार तिवारी ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डा. मनोज कुमार ने बताया कि हाइपरटेंशन को हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) भी कहा जाता है। यह अक्सर अनियमित जीवन शैली, मोटापा, तनाव को नजरअंदाज करने और खराब खानपान का परिणाम होता है। 30 वर्ष की आयु के बाद लोगों को नियमित अंतराल पर अपने ब्लड प्रेशर की जांच करानी चाहिए। अब तो बच्चों में भी यह समस्या सामने आने लगी है। इसी बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 17 मई को विश्व हाइपरटेंशन दिवस मनाया जाता है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में मरीजों की जांच के बाद उन्हें उपचार उपलब्ध कराया गया। इस मौके पर बीसीपीएम वीना, बीपीएम अनिल कुमार, स्टाप नर्स सिमरन, फर्मसिस्ट प्रवीन कुमार शर्मा आदि मौजूद रहे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विनय कुमार सिंह ने कहा- अगर हम संतुलित आहार ग्रहण करते हैं और स्वस्थ जीवन शैली अपनाते हैं तो निश्चित रूप से इससे बच सकते हैं। उच्च रक्तचाप से हार्ट अटैक, हार्ट स्ट्रोक, मनोभ्रंश, क्रोनिक किडनी की बीमारी और दृष्टि हानि जैसी गंभीर बीमारी हो सकती हैं। शुरुआत में इसका पता नहीं चलता है, बाद में परेशानी बढ़ जाती है।  जिसके सामान्य लक्षण सिरदर्द होना, ज्यादा तनाव, सीने में दर्द या भारीपन, सांस लेने में परेशानी, अचानक घबराहट, समझने या बोलने में कठिनाई, चेहरे, बांह या पैरों में अचानक सुन्नपन, झुनझुनी या कमजोरी महसूस होना या धुंधला दिखाई देना।  इसके बचाव के उपाय औसत रक्तचाप 80 से 120 और 85 से 135 के बीच रहना चाहिए। इससे अधिक होने पर उपचार लेना चाहिए। ऐसे मरीज ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करवाएं और खान पान का खास ध्यान रखें। 
व्यायाम कर वजन संतुलित रखें, धूम्रपान व शराब के सेवन से बचना चाहिए।

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