खुर्जा। ।भारत पुष्प। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खुरजा नगर की केशव बस्ती के द्वारा संघ शताब्दी वर्ष विजयदशमी उत्सव पर विशाल पथ संचलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुवात अनिल (सह जिला संघचालक), सुनील (नगर संघचालक) और रविकरन (विभाग संघचालक) ने शस्त्र पूजन कर कार्यक्रम की शुरुवात की। रविकरण ने सभी स्वयंसेवक बंधुयों को संबोधित किया कि आज का यह दिन केवल एक पर्व नहीं, एक प्रेरणा है — विजयदशमी, जो अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। इस वर्ष का यह क्षण, एक ऐतिहासिक संयोग लेकर आया है — क्योंकि यह संघ के शताब्दी वर्ष का प्रारंभिक वर्ष भी है।सन् 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने जिस दीपक को जलाया था, वह आज राष्ट्रनिर्माण की अखंड ज्योति बन चुका है।यह केवल संगठन की यात्रा नहीं, बल्कि समर्पण, साधना और राष्ट्रभक्ति की कथा है। भारत में कम्युनिज़्म आयातित विचारधारा के रूप में आया।उसने वर्ग, जाति, और धर्म के नाम पर समाज को बाँटने का कार्य किया।जहाँ संघ समाज को जोड़ने की बात करता है,वहाँ कम्युनिस्ट तोड़ने की राजनीति करता है।उन्होंने हर उस परंपरा का विरोध किया जो भारत को आत्मबल देती थी —राम, कृष्ण, गीता, गाय, या राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” तक को उन्होंने संदेह की दृष्टि से देखा।वामपंथी विचारकों ने विश्वविद्यालयों में, साहित्य में, मीडिया में ऐसी विचारधारा फैलाने का प्रयास किया जो भारतीयता को ही प्रश्नों के घेरे में खड़ा कर दे।परंतु सत्य यह है कि संघ ने सदैव संविधान और कानून का सम्मान किया।

आपातकाल के समय जब देश में आवाज दबा दी गई थी,तब संघ के हजारों स्वयंसेवक लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेलों में गए।स्वतंत्रता के बाद जब-जब संकट आया —चाहे 1962 का युद्ध हो, 1971 की विपत्ति, या प्राकृतिक आपदाएँ —संघ ने राष्ट्रहित में अग्रणी भूमिका निभाई।क्या किसी सत्ता-लोलुप संगठन से यह अपेक्षा की जा सकती है?जब हम कहते हैं “हिन्दू रक्षा”, तो उसका अर्थ किसी मज़हबी संघर्ष से नहीं, बल्कि उस जीवन-मूल्य की रक्षा से है, जो सहनशीलता, करुणा, सत्य और समरसता पर टिका है। हिन्दू का अर्थ है —वह जो सम्पूर्ण जगत को अपना मानता है,जो कहता है – “वसुधैव कुटुम्बकम्”,जो किसी को जीतने नहीं, जोड़ने निकला है।हमारा यह जीवन उसी भावना की रक्षा के लिए है —क्योंकि यदि हिन्दू संस्कृति बचेगी, तो मानवता बचेगी।और यदि भारत जीवित रहेगा, तो संसार में प्रकाश रहेगा।संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण का कार्य है। शाखा वह स्थान है जहाँ व्यक्ति राष्ट्रहित, अनुशासन, सेवा और संगठन का संस्कार पाता है। इसलिए प्रत्येक स्वयंसेवक का कर्तव्य है कि वह अपने परिचित, मित्र या परिवार के किसी सदस्य को शाखा से जोड़े। एक-एक स्वयंसेवक यदि एक नए व्यक्ति को शाखा लाए, तो संघ का कार्य दुगुनी गति से बढ़ेगा। यह केवल संख्या बढ़ाने का कार्य नहीं, बल्कि राष्ट्र के चरित्र निर्माण का कार्य है। “स्वयं शाखा जाए और किसी एक को साथ लाए — यही सच्ची सेवा है संघ और राष्ट्र की।”कार्यक्रम मे प्रचार विभाग की तरफ से साहित्य बिक्री का एक स्टॉल लगाया गया जिसमे जिला प्रचार प्रमुख लोकेश, जिला कार्यालय प्रमुख विवेक, मुकुल, शिवम ने स्वयंसेवक बंधुयों, और समाज से आये लोगो को साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित किया। फिर पथ संचलन नार्मल स्कूल से शुरु होकर नयी बस्ती, पदम सिंह गेट से पंजाब नेशनल बैंक से विंदा वाला चौक, रानी वाला चौक, घास मंडी, नवलपुरा से होते हुए नार्मल स्कूल पर समाप्त हुयी। कार्यक्रम मे केशव बस्ती के समस्त कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे।
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