खुर्जा। ।भारत पुष्प। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खुरजा नगर द्वारा 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर संघ कार्यालय में भव्य ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ खुरजा जिले के जिला सह संघचालक अनिल, नगर संघचालक सुनील, नगर सह संघचालक सामर्थ्य एवं जिला प्रचार प्रमुख लोकेश द्वारा संयुक्त रूप से तिरंगा लहराकर किया गया। इस अवसर पर संपूर्ण परिसर भारत माता के जयघोष से गूंज उठा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जिला प्रचार प्रमुख लोकेश ने अपने उद्बोधन में कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, उसकी चेतना और उसके लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव है। यह दिवस हमें स्मरण कराता है कि भारत का शासन उसकी जनता के विवेक, अनुशासन और कर्तव्यबोध पर आधारित है। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान हमें अधिकार प्रदान करता है, परंतु उससे पहले हमें कर्तव्यों का स्मरण कराता है, क्योंकि कर्तव्यनिष्ठ नागरिक ही सशक्त राष्ट्र की नींव होते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्पष्ट मत है कि राष्ट्र निर्माण केवल विधि-व्यवस्थाओं और कानूनों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए चरित्रवान, संस्कारयुक्त, राष्ट्रनिष्ठ और समाज के प्रति उत्तरदायी नागरिकों की आवश्यकता होती है। जब समाज संगठित, अनुशासित और स्वदेशी भावना से प्रेरित होता है, तभी गणतंत्र वास्तविक अर्थों में सशक्त बनता है। आज आवश्यकता है कि हम जाति, भाषा और क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को अपने जीवन में उतारें। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक होना केवल एक पहचान नहीं, बल्कि आजीवन राष्ट्रसेवा का संकल्प है। राष्ट्रप्रेम केवल भाषणों या नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे अपने दैनिक आचरण, व्यवहार और सेवा कार्यों में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देना चाहिए। संघ का स्वयंसेवक समाज का प्रहरी होता है—जो संकट के समय सबसे पहले आगे आता है और सफलता का श्रेय स्वयं नहीं लेता। डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जी के जीवन से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए श्री लोकेश जी ने कहा कि हेडगेवार जी का संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या और राष्ट्रसेवा का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने कहा था—“जब तक देश स्वस्थ नहीं होगा, तब तक उसका कोई भी नागरिक पूर्ण रूप से सुखी नहीं हो सकता।” अंग्रेजी शासन के विरुद्ध आंदोलन के समय जेल जाने से भी वे नहीं डरे और सत्याग्रह में भाग लेकर उन्होंने यह सिद्ध किया कि राष्ट्र के लिए किया गया प्रत्येक त्याग सेवा का ही एक रूप है। कार्यक्रम के अंत में सभी स्वयंसेवक बंधुओं ने संकल्प लिया कि वे तन, मन और जीवन से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखेंगे तथा स्वच्छता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, संस्कार निर्माण एवं सेवा कार्यों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान निरंतर देते रहेंगे।
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