–वर्षभर की उपलब्धियों का प्रस्तुत किया गया विस्तृत विवरण, विभाग संघचालक ने दिया संगठन, एकात्मता और राष्ट्रनिर्माण का प्रेरक संदेश
खुर्जा नगर। ।भारत पुष्प। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, खुर्जा नगर की ‘एकलव्य शाखा का प्रथम वार्षिकोत्सव अत्यंत उत्साह, अनुशासन एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों, स्थानीय प्रबुद्धजनों एवं मातृशक्ति की उपस्थिति रही। समारोह के दौरान शाखा के स्वयंसेवकों द्वारा विभिन्न शारीरिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित जनसमुदाय को राष्ट्रभक्ति एवं संगठन भावना से ओत-प्रोत कर दिया। कार्यक्रम के दौरान माधव बस्ती के बस्ती प्रमुख मुकुल ने शाखा की एक वर्ष की विकास यात्रा एवं उपलब्धियों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि 24 मई 2025 को इस शाखा का शुभारम्भ हुआ था तथा 10 जून 2025 को सर्वसम्मति से इसका नामकरण ‘एकलव्य शाखा’किया गया। उन्होंने बताया कि शाखा स्थापना के पश्चात निरंतर संगठन विस्तार एवं सामाजिक जागरण के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की गईं। प्रत्येक मंगलवार क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में मिलन कार्यक्रमों का आयोजन कर सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द एवं संगठनभाव को सुदृढ़ किया गया। विजयादशमी के पावन अवसर पर शाखा द्वारा भव्य पथ संचलन निकाला गया, जिसने नगरवासियों के मध्य विशेष आकर्षण उत्पन्न किया। इसके अतिरिक्त सामाजिक संपर्क अभियान के अंतर्गत स्वयंसेवकों द्वारा लगभग 600 परिवारों से गृह संपर्क कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारों एवं उद्देश्यों को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया गया। इस अभियान के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ते हुए राष्ट्रहित के कार्यों में सहभागिता हेतु प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य बौद्धिक पाथेय प्रदान करते हुए बुलंदशहर के विभाग संघचालक रविकरण ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के उद्देश्यों, संगठन की कार्यपद्धति तथा वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “जागरूक, संगठित एवं संस्कारित समाज ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होता है।” उन्होंने हिंदू समाज की एकता एवं संगठन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यदि समाज समय रहते संगठित नहीं हुआ तो भविष्य में अनेक चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने इतिहास से सीख लेने की आवश्यकता पर बल देते हुए वर्ष 1990 के जम्मू-कश्मीर विस्थापन का स्मरण कराया और बताया कि उस कठिन समय में संघ एवं समाज ने विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की सहायता एवं संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अपने प्रेरक उद्बोधन के अंत में रविकरण ने एक मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए जीवन के वास्तविक उद्देश्य को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को केवल व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं एवं धन अर्जन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज एवं राष्ट्रहित के लिए समय, श्रम एवं ऊर्जा का समर्पण करना चाहिए। उन्होंने उपस्थित सभी स्वयंसेवकों एवं नागरिकों से समाज कार्य के लिए नियमित समय निकालने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण में हुआ। अंत में शाखा कार्यकर्ताओं द्वारा सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा राष्ट्रसेवा एवं समाज जागरण के संकल्प के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम मे समस्त बाल स्वयंसेवक व समस्त कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे।
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