खुर्जा। ।भारत पुष्प। शुक्रवार को एकेपी डिग्री कॉलेज में आयोजित डॉ पद्मा उपाध्याय अन्तर्विश्वविद्यालयीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रो राजेश गर्ग ने कहा कि यजुर्वेद में राष्ट्र ऐसे क्षेत्र को कहा है जो न्यायप्रिय शासक द्वारा शासित हो, जहां क्षत्रिय शूर और बाणवेधन में कुशल महारथी हों, गायें दूध देने वाली हों, बैल भार ढोने में सक्षम हों, घोड़े शीघ्रगामी हों, स्त्रियां सुशील और सर्वगुण सम्पन्न हों, यथासमय वृष्टि हो, सुख भाव के असीम साधन हों, वैभव हो, संस्कृति व धर्म का अनुपालन होता हो वही भूखण्ड राष्ट्र कहा जा सकता है। प्रतियोगिता में विभिन्न विश्वविद्यालयों की 10 टीमों के प्रतिभागियों ने विषय के पक्ष व विपक्ष में अपने विचार रखे। प्रतियोगिता का शुभारंभ प्रो. राजेश गर्ग डी एबी बुलन्दशहर, डॉ पद्मजा मिश्रा कोर्स कोर्डिनेटर मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना बुलन्दशहर, डा पीयूष त्रिपाठी, डीएन पीजी कालेज गुलावठी व महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. डिम्पल विज ने वेदमंत्रोच्चारण के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की संयोजिका एकता चौहान ने बताया कि इस प्रतियोगिता का आयोजन प्रत्येक वर्ष महाविद्यालय की प्रथम प्राचार्या डॉ० पद्मा उपाध्याय की स्मृति में कराया जाता है। इस वर्ष प्रतियोगिता का विषय “विकसित भारत@2047 दिवास्वप्न या वास्तविकता” है। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान सम्भव चौधरी हरचन्द सिंह महाविद्यालय, द्वितीय स्थान खुशी एकेपी डिग्री कालेज खुर्जा, तृतीय स्थान बीना शर्मा ब्रह्मानन्द महिला महाविद्यालय को मिला। सांत्वना पुरस्कार अंजलि शर्मा ब्रह्मानन्द महिला महाविद्यालय, रजनी सोलंकी डीएवी बुलन्दशहर, दिव्या शर्मा केडी कालेज सिम्भावली ने प्राप्त किया। वहीं महाविद्यालय की चल वैजयन्ति ब्रह्मानन्द महिला महाविद्यालय ने प्राप्त की। प्रतियोगिता के दौरान निर्णायक डॉ पीयूष त्रिपाठी ने कहा कि विकसित राष्ट्र से तात्पर्य स्वस्थ प्रसन्न सर्वसुविधायुक्त, अनुशासित मर्यादित धार्मिक सुखी परिवेश से है। वर्तमान समय में वन्ध्य होती भूमि, भोजन पोषक तत्वों से हीन, विषाक्त जल, जहरीली वायु, अनवरत बढ़ता भौगोलिक तापमान, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, निर्वनीकरण, मूल्य रहित शिक्षा, दिग्भ्रमित युवा, धर्म के नाम पर बढ़ता पाखंड, अकर्मण्यता के फैलते पैर आदि ज्वलन्त समस्याएं हैं। जिनका समाधान किये विना विकसित राष्ट्र की संकल्पना करना दिवास्वप्न होगा। वहीं अन्य निर्णायक डॉ० पद्मजा मिश्रा भारत के विकसित राष्ट्र होने का मापन मानव विकास सूचकांक से है। अर्थात स्कूली शिक्षा, जीवन प्रत्याशा, प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय से है। इसमें जीवन की गुणवत्ता का व्यापक मैप जुड़े तो भारत के विकसित राष्ट्र बनने की संकल्पना सार्थक होगी। भारतीय ज्ञान परंपरा व आधुनिक शिक्षा के सामंजस्य से सशक्त आर्थिक व नैतिकता का भवन खड़ा होगा। कालेज की प्राचार्या प्रो. डिम्पल विज ने कहा कि आदर्श राष्ट्र की जब भी चर्चा होती है वहां रामराज्य को आदर्श राज्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। आपने रामराज्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि सभी सुखी हैं, कर्तव्य परायण हैं, दीर्घायु हैं, सभी में दाम्पत्य प्रेम है, प्रकृति से सुख है, सभी नैतिक रूप से उन्नत हैं। यही आदर्श परिवार व समाज की मांग है आपने समस्त प्रतिभागियों को विकसित भारत@2047 से जुड़ने का संदेश दिया। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार पढ़े महाविद्यालय बढ़े महाविद्यालय कार्यक्रम तथा दहेज मुक्त भारत व नशा मुक्त भारत की प्राचार्या प्रो डिंपल विज ने शपथ दिलाई । इस अवसर पर कालेज की समस्त शिक्षिकाएं, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं छात्राएं मौजूद रहीं।
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