– ताड़का और सुबाहु के वध के बाद लगे जय श्रीराम के नारे
खुर्जा। ।भारत पुष्प। श्री रामलीला महोत्सव, खुरजा के तत्वावधान में 75वां स्थापना वर्ष में ऋषि-मुनियों की रक्षा के लिए राम ने ताड़का और सुबाहु के वध का हुआ सुंदर मंचन। ताड़का वध और मारीच व सुबाहु के बीच युद्ध के अद्भुत मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला मंचन में राक्षसों की प्रताड़ना से दुखी ऋषि-मुनियों ने रक्षा के लिए मुनि विश्वामित्र से गुहार लगाई। इस पर मुनि विश्वामित्र महाराजा दशरथ के दरबार में जाते हैं। राजा दशरथ उन्हें राज सिंहासन पर विराजमान करवाते हैं। फिर श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को बुलाकर उन्हें मुनि विश्वामित्र का आशीर्वाद दिलाते हैं। वह ऋषि मुनियों की राक्षसों से रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण को साथ भेजने के लिए कहते हैं। तभी दुखी मन से राजा दशरथ पीड़ा बयां करते हुए कहते हैं, चाहे मेरे प्राण ले लें, मुझे तनिक भी भय नहीं परंतु कठोर व भयानक राक्षसों के बीच अपने पुत्रों को मैं भला कैसे जाने दूं। गुरु वशिष्ठ के समझाने पर राजा दशरथ ने बोझिल मन से श्रीराम व लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ जाने की आज्ञा प्रदान की। श्रीराम व लक्ष्मण को देखते ही ताड़का राक्षसी हुंकारते हुए उनकी ओर दौड़ी। श्रीराम के एक ही बाण से उसका वध हो गया। इसके बाद श्रीराम मुनि विश्वामित्र से भूख-प्यास से विचलित न होने एवं बल प्राप्ति की मंत्र विद्या प्राप्त करते हैं। साथ ही ऋषियों से निर्भय होकर यज्ञ करने को कहते हैं। ताड़का का पुत्र मारीच सेना लेकर श्रीराम से युद्ध करने पहुंचता है, लेकिन राम के बाण के प्रहार से वह समुद्र पार लंका में जा गिरा। श्रीराम सुबाहु का भी उसकी सेना सहित वध कर देते हैं। खुशी से देवगण आकाश से ही श्रीराम की जय-जयकार करते हैं। इसके बाद विश्वामित्र श्रीराम लक्ष्मण को राजा जनक के दरबार में सीता स्वयंवर में ले जाना चाहते हैं। वन के रास्ते में पड़ी एक शिला देख श्रीराम को विश्वामित्र ने गौतम ऋषि द्वारा अपनी पत्नी अहिल्या को श्राप देने तथा शिला बनने की कथा सुनाते हैं। ऋषि की आज्ञा से श्रीराम अपने पैरों से शिला को स्पर्श करते हैं और फिर अहिल्या प्रकट होकर श्रीराम के पैरों से लिपट जाती हैं। गुरु विश्वामित्र के साथ प्रभु राम व लक्ष्मण के आगमन का समाचार सुनकर राजा जनक उन्हें सुंदर महल में ठहराते हैं तथा आतिथ्य सत्कार करते हैं। मौके पर प्रधान पुनीत साहनी (विक्की), महामंत्री सचित गोविल, कोषाध्यक्ष सचिन बंसल, जन. मैनेजर दीपक गर्ग, मंदिर इंचार्ज अशोक पालीवाल, अरुण गर्ग सह मंदिर इंचार्ज, विनीत आर्य, रजत अग्रवाल, डीसी गुप्ता, विकास वर्मा, महेश भागव, संजय कुमार, विशाल वाधवा, अशोक अग्रवाल, टिम्मी कुमार, शंकर अग्रवाल, आशीष गोयल, ललित गुप्ता, गोलू माहौर, शुभम गुप्ता, सत्यप्रकाश, बासुदेव शर्मा आदि कमेटी मेंबर मौजूद रहे ।
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