खुरजा। नगर के प्रसिद्ध श्री नवदुर्गा शक्ति मंदिर पर मंगलवार को मां महागौरी की पूजा अर्चना की गयी। मातारानी को लाल रंग की पोषाक धारण कराकर उन्हें नारियल का भोग लगाया गया। मंदिर पुजारी सुरेश ओझा ने बताया कि मातारानी का वाहन बैल है। इनका वर्ण पूर्णतः गौर है। इस गौरता की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है- ‘अष्टवर्षा भवेद् गौरी।’ इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं। महागौरी की चार भुजाएँ हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है।
ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है। यही महागौरी देवताओं की प्रार्थना पर हिमालय की श्रृंखला मे शाकंभरी के नाम से प्रकट हुई थी। प्रधान देवेश कौशिक ने बताया कि मंदिर के गर्भ ग्रह में श्री शिव परिवार श्री नर्मदेश्वर महोदव के रूप में विराजमान हैं। जहां भक्त अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान श्री नर्मदेश्वर महोदव की पूजा अर्चना को पहुंचते हैं। साथ ही मंदिर समिति के आजीवन सचिव रोहित अग्रवाल ने बताया कि अष्टमी के मौके पर मातारानी को 1008 किलो सूजी के हलवे का भोग लगाकर भक्तों में वितरित कराया गया। साथ ही बताया गया कि मंदिर प्रांगण में मौजूद हनुमान जी के विशाल विग्रह जिन्हें राम लखन सीता मन बसिया के नाम से भी जाना जाता है के सम्मुख हर मंगलवार को सुंदर कांड के पाठ का आयोजन किया जाता है। मंदिर व्यवस्थाओं में कमेटी के अनेक सदस्य वह पुलिस प्रशासन मौजूद रहे।
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