सिकंद्राबाद। ।भारत पुष्प/पवन शर्मा। नगर में चल रही रामलीला में दर्शाया गया की जब राजा दशरथ के चारो पुत्रों राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न का विवाह हो गया और अयोध्या मे रहने लगे तो एक दिन राजा दशरथ ने राज्यसभा में सोच विचार कर राम को राजगद्दी देने की घोषणा कर दी तो देवताओं में खलबली मच गई और वो माता सरस्वती के पास गये और राम को राज ना होने की गुहार लगायी तो माता सरस्वती ने रानी कैकयी की दासी मंथरा की बुद्धी पर विराजमान हो गयी और रानी कैकयी को भड़का कर राजा दशरथ से अपने 2 वरदान मांगने को कहा तो रानी कैकयी ने राजा दशरथ से 2 वरदानों में अपने पुत्र भरत को राजगद्दी व भगवान श्री राम को चौदह वर्ष का वनवास मांग लिया तो भगवान श्री राम ने माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हुए ओर नारद के श्राप के कारण अपनी पत्नि सीता के वियोग मे वन-वन भटकना और वानर द्वारा सहायता करना को ध्यान में रखते हुए राम जी ने चौदह वर्ष का वनवास खुशी-खुशी स्वीकार कर वन को तीनो प्राणी राम लक्ष्मण और सीता चले गये ओर उधर अयोध्या में राजा दशरथ का पुत्र वियोग में तड़प-तड़प कर स्वर्गवास हो गया।

यहा तक की लीला का सार सुविख्यात कथा वाचक दामोदर दास शर्मा वृंदावन वालों ने रसास्वादन कराया। इस मौके पर रामलीला कमैटी के प्रधान पं राकेश शर्मा, चैयरमैन सचिन शर्मा, राहुल गुप्ता, राकेश मोहन सर्राफ, जगदीश बजाज, लोकेश कोशल, अर्जुन वर्मा, अरविंद दीक्षित के अलावा सैंकड़ो भक्तगण मौजूद रहे।

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