–डग्गेमार वाहनों पर ट्रेफिक पुलिस है मेहरबान
–डग्गेमार वाहनों के चालान काटने में पुलिस करती है गुरेज
सिकंद्राबाद। ।भारत पुष्प/पवन शर्मा। आजकल शहर-शहर, कस्बे-कस्बे में डग्गेमार वाहनों से जाम का झाम लगता नजर आता है जाता है और ऐसे जाम के झाम के कारण आमजन के साथ-साथ बुजुर्गो का आवागमन करना बहुत मुश्किल होता है। जाम जैसी बिमारी से परेशान होकर समाज के विभिन्न संगठन लगातार आवाज उठाते रहते मगर सरकारी मशीनरी के कान पर जूं तक नही रेंगती है और इस तरह के जामं के कारण जब कोई अनहोनी हो जाती हैं वही सरकारी मशीनरी हरक़त में आती हैं और बड़े-बड़े दावे करते हैं और कुछ दिनों बाद मामला दबा दिया जाता है। ऐसी ही जाम के झाम की बिमारी नगर में भी लगातार बनी हुई है जिसको लेकर नगर के विभिन्न संगठन उद्योग व्यापार मंडल नरेंद्र, इटवा व्यापार मंडल, किसान यूनियन के विभिन्न संगठन लगातार लिखित शिकायत नगर एसडीएम व पुलिस प्रशासन को दे चुके है और हर एक शांति समिती की बैठक में भी इस जाम के झाम की बीमारी की आवाज उठाते आ रहें मगर इस बिमारी का ईलाज आजतक सिकंद्राबाद प्रशासन नही कर पाया।
इस जाम के झाम की हकीकत जानने को जब हमारे संवाददाता ने कोतवाली की नाक के नीचे दनकौर तिराहे पर खड़े टीएसआई राजीव कुमार से जानकारी जुटाई की दनकौर तिराहे पर जगह-जगह खड़े डग्गेमार वाहनों टेंपो व बसों के लिए स्टेंड बना दिया गया है तो साहब ने बताया की यहां पर कोई किसी भी प्रकार का स्टेंड नही बनाया गया तब पूछा गया कि इन डग्गेमार वाहनों के चालान काटने की कार्यवाही कौन करेगा तो साहब ने बताया की हम ही करेंगे और में अभी चालान काटूंगा मगर की चालान काटने की जगह पर साहब के अधिनस्थ ने उस डग्गेमार टेंपो पर मेहरबानी की छत्रछाया रखकर आगे को रवाना करा दिया और आगे कोतवाली के सामने भी ऐसे डग्गेमार वाहन सवारी भरने का इंतजार करते हुए खड़े नजर आये। आखिर क्यूं मेहरबान है सिकंद्राबाद पुलिस, कौन लगायेगा लगाम इन डग्गेमार वाहनों पर, ट्रेफिक पुलिस के होते हुए भी आखिर क्यूं खड़े होते हैं ऐसे डग्गेमार वाहन जबकी दुपहिया वाहनों व फोर के काटे जाते है दनादन चालान, जबकि अब वर्तमान में जिला ट्रेफिक इंचार्ज सिंघम लेडी सी0ओ पूर्णिमा सिंह है जो एक कर्मठ व मेहनती एवं ईमानदारी अधिकारी तैनात हैं। अगर ऐसे जिला ट्रेफिक इंचार्ज सी0ओ के होते हुए भी इन डग्गेमार वाहनों पर लगाम नही लग सकी तो आने वाले समय में इस बिमारी का ईलाज मुश्किल है।
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