खुरजा। ।भारत पुष्प। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, खुरजा नगर की सभी शाखाओं पर हिन्दू साम्राज्य दिवस अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। यह दिवस छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक राज्याभिषेक एवं हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना के गौरवपूर्ण स्मरण के रूप में आयोजित किया गया। नगर की सभी शाखाओं पर स्वयंसेवकों, कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। सम्पूर्ण वातावरण राष्ट्रभक्ति, अनुशासन एवं संगठन की भावना से ओत-प्रोत दिखाई दिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ भगवा ध्वज के समक्ष ध्वजारोहण एवं संघ प्रार्थना के साथ हुआ। इसके पश्चात देशभक्ति गीत, अमृत वचन, प्रेरक प्रसंग तथा बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वयंसेवकों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के अद्वितीय शौर्य, राष्ट्रनिष्ठा, संगठन कौशल, दूरदर्शी नेतृत्व एवं हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना के ऐतिहासिक महत्व का स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। अर्जुन शाखा के कार्यक्रम में नगर संघचालक सुनील ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिन्दू साम्राज्य दिवस केवल एक ऐतिहासिक घटना का स्मरण नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान, स्वाभिमान, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रजीवन को जागृत करने का प्रेरणापर्व है। छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक उस युग में भारतीय समाज के आत्मविश्वास और स्वतंत्र चेतना का उद्घोष था। यह केवल किसी एक राजा का राज्याभिषेक नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति, स्वाभिमान और राष्ट्र की अस्मिता की विजय का ऐतिहासिक क्षण था। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने अद्भुत पराक्रम, संगठन शक्ति, राष्ट्रभक्ति और दृढ़ संकल्प के बल पर हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना की। उन्होंने यह सिद्ध किया कि जब समाज संगठित होता है, नेतृत्व चरित्रवान होता है और लक्ष्य राष्ट्रहित होता है, तब कोई भी शक्ति उसकी प्रगति को रोक नहीं सकती। शिवाजी महाराज का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रधर्म, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, साहस और जनकल्याण का अनुपम उदाहरण है। नगर संघचालक ने कहा कि शिवाजी महाराज का शासन केवल युद्ध-कौशल तक सीमित नहीं था। उनका प्रशासन न्याय, सुशासन, प्रजा-वत्सलता, महिला सम्मान, धार्मिक सहिष्णुता, प्रशासनिक दक्षता और लोककल्याण के आदर्शों पर आधारित था। उन्होंने सत्ता को कभी व्यक्तिगत वैभव का साधन नहीं माना, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का माध्यम बनाया। यही कारण है कि वे आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा के शाश्वत स्रोत हैं। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज के संगठन को ही राष्ट्र निर्माण का मूल आधार मानता है। शाखा के माध्यम से स्वयंसेवकों में अनुशासन, सेवा, समरसता, राष्ट्रभक्ति, नेतृत्व क्षमता एवं चरित्र निर्माण के संस्कार विकसित किए जाते हैं। संघ का उद्देश्य ऐसा संगठित, जागरूक और संस्कारित समाज तैयार करना है, जो राष्ट्र के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बने। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों का आह्वान करते हुए कहा कि आज आवश्यकता केवल छत्रपति शिवाजी महाराज का स्मरण करने की नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपने व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में उतारने की है। प्रत्येक स्वयंसेवक अपने परिवार में संस्कार, समाज में समरसता, राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध तथा सेवा की भावना को सुदृढ़ करे। समाज का प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने उत्तरदायित्व का ईमानदारी से निर्वहन करे, तो भारत पुनः विश्व में अपने गौरवपूर्ण स्थान को प्राप्त करेगा। उन्होंने अपने उद्बोधन का समापन करते हुए कहा कि हिन्दू साम्राज्य दिवस हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि हम राष्ट्र की एकता, अखंडता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहेंगे। अपने जीवन का प्रत्येक क्षण राष्ट्रसेवा, समाज संगठन और चरित्र निर्माण के लिए अर्पित करेंगे। यही छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी और यही हिन्दवी स्वराज्य की भावना का वास्तविक सम्मान है। कार्यक्रम के अंत में सभी स्वयंसेवकों ने राष्ट्र की उन्नति, समाज की एकता एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। संघ प्रार्थना के उपरांत “भारत माता की जय”, “वन्दे मातरम्” तथा “जय जय शिवराय” के घोषों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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