खुर्जा। ।भारत पुष्प। सोमवार को एकेपी डिग्री कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना द्वितीय इकाई का छठे दिवस की थीम “महिला उद्यमिता” रही। जिससे संबंधित स्वयं सेविका हिमशिखा और खुशबू ने रंगोली बनाई। कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर गीता सिंह के नेतृत्व में दैनिक अभ्यास जैसे लक्ष्य गीत, आवाहन गीत एवं श्रमदान गतिविधि के साथ शिविर शुभारंभ हुआ। इसके बाद खाद्य एवं फल संरक्षण विभाग बुलंदशहर के प्रवेंद्र कुमार चौधरी कैंप में पहुंचे। जिन्होंने खाद्य एवं फल संरक्षण से संबंधित विभिन्न रोजगारों एवं सरकारी अनुदानों पर प्रकाश डाला। जिसकी सहायता से कोई भी महिला या पुरुष लघु उद्योग इकाई स्थापित कर सकता है। जिसके लिए लोन का भी प्रावधान है लेकिन उसके लिए सिविल सही होनी चाहिए। इसके लिए सर्वप्रथम उधम मैं रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होता है। इसके बाद उन्होंने जैम, जेली ,अचार मुरब्बा, पापड़ बनाने की विधियां भी बताई ,उन्हें संरक्षित रखने के तरीके भी बताएं। स्वयंसेविकाओं तथा ग्रामीण महिलाओं ने स्वरोजगार स्थापित करने हेतु विभिन्न प्रकार की जानकारियां भी ली। भोजन के उपरांत तृतीय सत्र में बीमा क्षेत्र में “रोजगार की संभावना “विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसके तहत लिक खुर्जा ब्रांच के डा. एन सी प्रजापति, एवं एकेपी डिग्री कॉलेज खुर्जा की बीमा सखी कुमारी रूशाली ने अपना वक्तव्य दिया। जीवन के साथ भी जीवन के बाद भी , के लक्ष्य पर एलआईसी बीमा योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बीमा के महत्व को समझाया। कैंप में उपस्थित विभिन्न स्वयंसेविकाओं ने बीमा सखी बनने में रुचि दिखाई। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. डिंपल विज ने कहा कि महिला घर खेत खलियान तथा उद्योगों में कार्य तो बहुत करती है लेकिन विकास में उसके योगदान को महत्व नहीं मिल पाता। अतः स्वरोजगार उसके लिए एक अच्छा विकल्प है।कार्यक्रम अधिकारी डॉ गीता सिंह ने कहा कि महिला रोजगार से न केवल एक परिवार की तरक्की होती है बल्कि समाज और देश भी उन्नत बनता है।
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