खुर्जा। ।भारत पुष्प। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खुरजा नगर इकाई द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी अखण्ड भारत संकल्प दिवस बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। नगर के सरस्वती विद्या मंदिर, आदर्श शिशु मंदिर, रामामूर्ति स्कूल, एसएमजे इंटर कॉलेज तथा महर्षि वाल्मीकि चौक पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन स्थानों पर स्वयंसेवकों, स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। बुलंदशहर विभाग के विभाग सेवा प्रमुख सरवचन ने संबोधित करते हुए कहा“आज के दिन ही हमारी भारत माता को विभाजित कर दिया गया था। हमारी विचारधारा और उनकी विचारधारा एक दिन अवश्य एक हो जाएगी। हमारा डीएनए एक है। वे सब हिंदू हैं। जिस दिन वे गंगा, गीता और गौ माता को अपना मानना शुरू कर देंगे, उसी दिन वे हमारे सच्चे भाई बन जाएंगे। हम अपने देश को युक्त और अखंड मानते हैं, विभाजित नहीं। लेकिन कुछ आततायी, स्वार्थी और राजनीतिक गुंडे तत्वों ने अपनी कुर्सी और सत्ता के लोभ में 50 करोड़ हिंदुओं को धोखा देकर देश का विभाजन कर दिया। उस समय न तो यह देखा गया कि लोग कहाँ रहेंगे, न उनकी सुरक्षा की चिंता की गई। केवल सत्ता की होड़ में राष्ट्र को टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया।” नगर कार्यवाह सुदर्शन ने अखण्ड भारत संकल्प दिवस पर विस्तृत बौद्धिक देते हुए कहा“संघ हर वर्ष अखण्ड भारत का संकल्प लेता है। यह संकल्प केवल शब्दों का नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता, ऐतिहासिक विरासत और भावी पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। भारतवर्ष कभी केवल राजनीतिक सीमाओं से नहीं बँधा। हमारी संस्कृति, सभ्यता, भाषा, धर्म और परंपराएँ हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक फैली हुई थीं। विभाजन के समय संघ ने स्वयंसेवकों के माध्यम से शरणार्थियों की सेवा, सुरक्षा, राहत वितरण और पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। संघ का लक्ष्य सदैव राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक जागरण रहा है। आज भी हमें उसी भावना से काम करना है कि भारत पुनः अखंड और मजबूत बने।”अखण्ड भारत की अवधारणा प्राचीन भारतीय संस्कृति और इतिहास पर आधारित है। इसमें वर्तमान भारत के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से वे सभी क्षेत्र शामिल माने जाते हैं जो कभी भारतीय सभ्यता, संस्कृति और परंपरा से जुड़े रहे। इनमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के कुछ भाग, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, म्यांमार तथा तिब्बत आदि क्षेत्र सांस्कृतिक अखंडता के संदर्भ में उल्लेखित होते रहे हैं। संघ का यह संकल्प राजनीतिक विस्तार का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता, राष्ट्रभाव और ऐतिहासिक गौरव को पुनर्स्थापित करने का है। 1947 के देश विभाजन के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में स्वयंसेवकों के संगठन के माध्यम से राहत कार्य किए। प्रभावित क्षेत्रों में शरणार्थियों की सुरक्षा, भोजन-वस्त्र वितरण, चिकित्सा सहायता तथा सामाजिक समरसता बनाए रखने में संघ के स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। संघ ने विभाजन को राष्ट्र के लिए एक दुखद और अप्राकृतिक घटना माना तथा राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के लिए निरंतर कार्य किया। कार्यक्रम के दौरान सभी स्वयंसेवकों ने अखण्ड भारत के संकल्प को दोहराया। उन्होंने राष्ट्र की एकता, अखंडता, सांस्कृतिक गौरव तथा मातृभूमि की सेवा के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में देशभक्ति के गीत, राष्ट्रगान तथा संघ प्रार्थना का भी गायन हुआ। उपस्थित सभी लोगों ने अखण्ड भारत के संकल्प को हृदय से स्वीकार किया
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