बुलंदशहर। ।भारत पुष्प। सामाजिक संस्था राष्ट्र चेतना मिशन के तत्वावधान में देश के अमर क्रान्तिकारियों की स्मृति में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न शहरों से पधारे कवियों ने अपनी शानदार रचनाओं से देशभक्ति का जज़्बा जगाया। शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु के 95वें बलिदान दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्र चेतना मिशन द्वारा मोती बाग स्थित हिन्दी साहित्य परिषद भवन में आयोजित कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे बुलंदशहर जिले के मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रमोद शर्मा एवं कार्यक्रम अध्यक्ष योगगुरु नरेन्द्र बंसल, विशिष्ट अतिथि गौरव गर्ग सहित संगठन के अध्यक्ष हेमन्त सिंह तथा सभी कवियों ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पार्चन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। संस्था के पदाधिकारियों ने दूर दूर से पधारे सभी कवियों को माला पहनाकर, भगवा अंग वस्त्र तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत अभिनंदन किया। गाजियाबाद से पधारी कवयित्री पूजा शुक्ला द्वारा सरस्वती वन्दना की प्रस्तुति के उपरान्त हापुड़ से पधारे ओज के युवा कवि विकास विजय त्यागी ने अपनी रचना सुनायी- हम ना होंगे कल यहाँ निशानियाँ होंगी, इतिहासों के पन्नो पर कहानियाँ होंगी। वक्त लेगा वजन हर किरदारों का, तराजू के पलड़ों पर कल ये जवानियाँ होंगी। मेरठ से आए डॉ सुदेश यादव ने सुनाया- संभल कर बोलना हमसे बहुत मुँहजोर हैं हम भी, बुलंदी पर खड़े थे तुम तो आता दौर हैं हम भी। डुबाने के सनम तेवर दिखाना सोचकर हमको, अगर दरिया तुम्हें कहते तो गोताख़ोर हैं हम भी। ग़ाज़ियाबाद से पधारे प्रख्यात राष्ट्रीय कवि डॉ स्वदेश यादव ने देश के युवाओं को उद्धृत करते हुआ कहा कि अगर परखोगे तो कुंदन सा ही ईमान निकलेगा, दिल में कुछ बड़ा करने का भी अरमान निकलेगा। मेरी पीढ़ी के ये लड़के भले कितने भी हों मॉडर्न, अगर चीरेंगे ये सीना तो हिंदुस्तान निकलेगा। बुलंदशहर निवासी तथा राज्य सरकार द्वारा सम्मानित महाकवि देवेन्द्र देव मिर्जापुरी ने शहीदों को वंदन करते हुए कहा कि लौट आने की दिलासा देकर गए थे देव, ओढ़ के तिरंगा मुँह मोड़ के चला गया। श्रृंगार की कवयित्री पूजा शुक्ला ने कहा- हर वचन की पीठिका पर इक कहानी रख रही हूँ, ज़िन्दगी के इस सफ़र में प्रीत धानी रख रहा हूँ। तुम मेरे विश्वास का अनुराग का दामन संभालो, मैं तुम्हारे हाथ में सिंदूरदानी रख रही हूँ। कार्यक्रम के संचालन कर रहे युवा कवि हरित तोमर ने भी राष्ट्र रक्षा में अपना बलिदान देने वाले वीर सपूतों को नमन करते हुए कहा कि हिन्द की हवाओं को जिन्होंने महका दिया था, अमर शहीदों की कहानी मत भूलना। माता भारती की शान में जो जो गए हवन, भारती के लालों की जवानी मत भूलना। रंग दे बसन्ती चोला गाते- गाते तजे प्राण, ऐसे भव्य गीत की रवानी मत भूलना। और खेलने की उम्र में ही प्राण किए बलिदान, आज़ादी के नारों की निशानी मत भूलना। रात्रि तक चले कार्यक्रम के समापन होने पर मुख्य अतिथि सीएफ़ओ प्रमोद शर्मा और कार्यक्रम अध्यक्ष नरेन्द्र बंसल के साथ राष्ट्र चेतना मिशन के अध्यक्ष हेमन्त सिंह, सचिव मयूर अग्रवाल, कोषाध्यक्ष गौरव गर्ग आदि ने समस्त कवियों को स्मृति चिह्न और उपहार भेंट किया। कार्यक्रम में आचार्य कृष्ण मिश्र, उमेश कुमार चौधरी, राजीव सिंघल, न्यू गुप्ता, कपिल राणा, मधु वार्ष्णेय, पृथ्वीराज सिंह, लोकेन्द्र सिंह, पिंटू गुर्जर, हिमांशु राणा, नवीन गुप्ता, अतुल रावत, शिवम अग्रवाल, रामावतार लोधी, राहुल अग्रवाल, अतुल कृष्ण दास, मधुर श्याम गुप्ता आदि दर्जनों लोग उपस्थित रहे।

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