खुर्जा। ।भारत पुष्प। श्री रामलीला कमेटी रजिस्टर्ड के तत्वाधान में सीता हरण रावण में जटायु का युद्ध प्रभु श्री राम का जटायु से मिलन जटायु को मोक्ष प्रदान करना एवं सबरी पर कृपा का सुंदर मंचन रामलीला मैदान में किया गया l इस मंचन को करने में आचार्य वेद प्रकाश शर्मा एवं पंडित अनिल शर्मा व प्रेम प्रकाश शर्मा द्वारा कराया गया l प्रभु श्री राम द्वारा मृग भेष धारी मारीच के वध के समय रूप और आवाज बदलने में माहिर मारीच आह लक्ष्मण – आह लक्ष्मण की आवाज निकालता है l यह आवाज सुनकर माता जानकी चिंतित हो उठती हैं तथा श्री लक्ष्मण जी से कहती हैं, कि आपके भाई पर कोई संकट आया है आप जाकर उनकी मदद करो l श्री लक्ष्मण जी माता जानकी को समझाते हैं , की प्रभु राम के आदेश पर मुझे आपकी रक्षा में चित्रकूट पर ही रहना है l लेकिन पति को संकट में जानकर माता जानकी ,लक्ष्मण जी को धिक्कारती हैं ,तथा श्री रामचंद्र जी की सहायता का आदेश देती हैं l माता जानकी के आदेश पर लक्ष्मण जी चित्रकूट के बाहर एक लक्ष्मण रेखा खींचते हैं तथा माता जानकी को इस रेखा से बाहर ना आने की कहकर वह बड़े भाई श्री रामचंद्र जी की तलाश में चले जाते हैं l इधर लक्ष्मण जी के चित्रकूट से जाते ही ,अपनी कलुषित योजना को साकार करने के लिए लंकेश रावण ब्राह्मण का रूप धरकर माता जानकी से भिक्षा की मांग करता है l माता सीता साधारण ब्राह्मण जानकर उनको भिक्षा लेकर आती हैं तथा उन्हें भिक्षा देने का प्रयास करती है l ब्राह्मण वेषधारी रावण लक्ष्मण रेखा की महत्वता को जानता है l उसने माता जानकी को रेखा से बाहर आकर भिक्षा देने की मांग की l ब्राह्मण भेषधारी रावण की भावनाओं को ना समझते हुए माता जानकी लक्ष्मण जी की रेखा ना लांघ ने की बात को अनसुनी कर रेखा से बाहर आकर भिक्षा देती है l माता जानकी जैसे ही लक्ष्मण रेखा लाँघती है ,रावण उनका हरण कर लेता है तथा पुष्पक विमान में बैठाकर लंका की और चलता है, माता जानकी चीख पुकार करती हैं l उनकी चीख पुकार सुनकर श्री राम भक्त पक्षी राज जटायू रावण के विमान का रास्ता रोकने का प्रयास करता है l जिससे रावण क्रोधित हो जाता है तथा जटायु पर वार कर उनके पंख काट देता है l वृद्ध जटायू घायल अवस्था में नीचे गिर जाता है l यह देख कर उपस्थित अपार जनसमूह हक्का-बक्का रह जाता है। उनकी आंखें सजल हो उठती है l इधर मारीच को मार कर वन में लौट रहे प्रभु श्री राम तथा प्रभु राम की तलाश में लक्ष्मण जी का मिलन होता है l यह देख कर प्रभु श्री राम चौक जाते है, तथा अनिष्ट की आशंका से भाई लक्ष्मण के साथ शीघ्रता से वापस अपनी कुटिया पर आते हैं वहां पर सीता को न पाकर दोनों भाई अनिष्ट की आशंका से घिर जाते हैं l माता जानकी की तलाश में श्री रामचंद्र जी अपने अनुज लक्ष्मण के साथ वनों में घूमते हैं तथा जंगल निवासियों के साथ-साथ जीव जंतुओं से भी माता जानकी के बारे में पूछते हैं l हे खग मृग, हे मधुकर श्रेयणी l तुम देखी सीता मृग नैनी ll रास्ते में उन्हें घायल अवस्था में पक्षीराज जटायु मिलते हैं, तथा वह प्रभु श्री राम जी को रावण द्वारा माता सीता को हरण कर ले जाने और विरोध करने पर पंख काट कर घायल करने का वृत्तांत सुनाया l इस बार श्री राम जी, घायल जटायू के ऊपर कृपा करते हैं तथा पक्षी राज जटायु को मोक्ष प्रदान करते हैं l माता सीता की खोज में प्रभु श्री राम अनुज लक्ष्मण संग, मतंग ऋषि के आश्रम में पहुंचते हैं l वर्षों से ऋषि मतंग के आश्रम में शबरी प्रभु श्री राम को देखकर धन्य हो उठती है l श्री राम के चरणों में शीश नवाकर एवं चरणों में लोटकर उनकी चरण वंदना करती है l प्रभु श्री राम उन्हें उठाते हैं l शबरी प्रभु श्री राम व लक्ष्मण जी की थकान देखकर आश्रम में लगे बेर चख चख कर उन्हे खिलाती है ताकि भगवान को मीठे बेर ही खाने को मिले l श्री राम शबरी के झूठे बेर बड़े प्रेम से खाते हे l श्री राम शबरी को बताते हैं कि वह तो नवधा भक्ति को प्राप्त हो चुकी हैं अंत में शबरी मोक्ष प्राप्त करती हैl श्री रामलीला कमेटी की आज की व्यवस्था में पुनीत साहनी प्रधान, सचित गोविल महामंत्री, दीपक गर्ग जनरल मैनेजर, सचिन बंसल कोषाध्यक्ष, नवीन कुमार एडवोकेट, रवि अग्रवाल, चंद्रप्रकाश तायल मीडिया इंचार्ज, चमन लाल जुनेजा सभासद, आकाश शर्मा सभासद, पीलू अग्रवाल, विनोद पहलवान, महेश चौधरी, विनीत आर्य सोशल मीडिया प्रभारी, विकास वर्मा, डीसी अग्रवाल, नरेश गर्ग, डॉ अनिल गुप्ता, अशोक पालीवाल, संजय, अनमोल अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में सदस्य एवं पदाधिकारी लगे हुए थे l
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