सिकंद्राबाद। ।भारत पुष्प/पवन शर्मा। आर्य समाज मंदिर के पदाधिकारीयों द्वारा श्री कृष्ण कथा का आयोजन का शुभारंभ श्री कृष्ण जन्म लीला से किया गया ओर बधाई गाकर खुशी मनायी गयी। उसके बाद तृतीय दिवस में कृष्ण जरासंघ युद्ध, कृष्ण द्वारा द्वारा द्रोपदी धैर्य धारण करना व महाभारत युद्ध के लिए शांति दूत बनकर कृष्ण का हस्तिनापुर जाने तक की कथा का रसास्वादन कल कराया। श्री कृष्ण द्वारा रखे गये शांति प्रस्ताव को जब दुर्योधन ने ठुकरा दिया तो युद्ध होने लगा तभी अर्जुन की काया में मोह जाग उठा तो श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को उपदेश देने के बाद पितामह भीष्म को शर शैय्या पर लिटा दिया ओर उसके बाद अभिमन्यु का षडयंत्र रचकर धोके से वध कर दिया था उसके बाद जयद्रथ वध, कर्ण वध, द्रोणाचार्य वध, दुसाशन वध, ओर अंत में अधर्मी व अहंकारी अधर्म के रास्ते पर चलने वाला दुर्योधन का भीम द्वारा वध ओर उसके बाद द्रोणाचार्य पुत्र अश्वथामा द्वारा पाड़वो के 5 पुत्रो का वध होने के बाद हस्तिनापुर में जाकर युधिष्ठिर ने राजपाठ की कमान सँभाली ओर श्री कृष्ण भी इस दुनिया को छोड़ कर चले गए थामा यहाँ तक की कथा का रसास्वादन कथा वाचक पंडित संगीता शास्त्री ने बड़े ही प्रेम व सादगी से कराया ओर इस कथा का सकुशल समापन करा दिया।
इस प्रेरणा भरी श्री कृष्ण कथा के माध्यम से बहुत ही सुंदर तरीके से समझा-समझाकर सनातनी को संस्कारवान व धर्म कर्म पर चलने वाले बच्चें बनाने के नसीहत दी ओर कहा की संस्कार बाजार में नहीं बिकते ये माँ बाप द्वारा ही दिये जाते हैं ओर कहा की अपने भारत देश के विकास के लिए हम सभी सनातनीओं को अपने देवी-देवता के पद चिन्हों पर चलना होगा होगा ओर जैसे श्री कृष्ण जी महाराज ने महाभारत युद्ध के बाद नया भारत बनाया था उसी प्रकार हम सभी सनातनीयों को करना होगा। इस मौके की स्वामी प्रणदेव महाराज, ऋषि महेश योगी, योग गुरु ललित शर्मा, साधना शर्मा, अनुप भाटी, विनोद आर्य, राजीव सिंघल, नरेश सैनी, पन्नालाल नीरज, सुरेंद्र सौरभ रजनीश प्रो, इंद्र यशपाल सोंलकी के अलावा गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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