खुर्जा। गत वर्षो की भांति इस वर्ष भी जंक्शन मार्ग स्थित रामलीला मैदान में उत्तर भारत की सुप्रसिद्ध श्री रामलीला कमैटी (रजिस्टर्ड) के तत्वावधान में 75वाँ स्थापना वर्ष में पण्डित वेद प्रकाश शर्मा व पण्डित प्रेम प्रकाश शर्मा द्वारा लीला श्री राम सुग्रीव मित्रता, बाली सुग्रीव युद्ध, बाली वध, सुग्रीव का राजतिलक, प्रसंग दर्शाया गया। श्री राम और सुग्रीव की मित्रता रामायण की एक महत्वपूर्ण घटना है, जहाँ श्री राम ने अपनी पत्नी सीता की खोज के लिए सुग्रीव की मदद ली और बदले में सुग्रीव को उसके भाई बाली से राज्य वापस दिलाने का वचन दिया. यह मित्रता पारस्परिक सहायता, विश्वास और सच्ची दोस्ती के आदर्शों पर आधारित थी, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे के दुख-सुख में साथ देने का संकल्प लिया।
रामायण के अनुसार, बाली-सुग्रीव युद्ध का मुख्य कारण बाली द्वारा अपने भाई सुग्रीव को राज्य से निष्कासित करना और उसकी पत्नी व संपत्ति पर अधिकार करना था. राम की मदद से सुग्रीव राज्य वापस पाने के लिए बाली से युद्ध करता है, लेकिन पहचान न कर पाने के कारण राम बाली का वध नहीं कर पाते. अंततः राम के दिए गए वचन पर सुग्रीव बाली से युद्ध करता है, और श्री राम बाली को मार देते हैं। बाली वध एक ऐसा प्रसंग है जहाँ भगवान राम ने सुग्रीव की मदद के लिए बाली को छुपकर तीर मारा था। यह घटना राम और सुग्रीव की मित्रता का परिणाम थी, क्योंकि बाली ने सुग्रीव से उसका राज्य और पत्नी छिन ली थी। राम ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि बाली के पास एक वरदान था कि वह अपने सामने आने वाले की आधी शक्ति खुद में समाहित कर सकता था। इस प्रकार, यदि राम सीधे बाली से लड़ते, तो उसकी शक्ति बढ़ जाती। बाली की मृत्यु के बाद, सुग्रीव को उनका राज्य और सम्मान वापस मिला। रामायण के अनुसार, बाली की मृत्यु के बाद भगवान राम ने लक्ष्मण को सुग्रीव का किष्किंधा का राजा घोषित करने के लिए भेजा था, और लक्ष्मण ने ही उनका राज्याभिषेक किया था। इस समारोह में सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाया गया और उन्होंने अंगद को सेनापति तथा जामवन्त को सलाहकार नियुक्त किया। इस दौरान पुनीत साहनी (विक्की), सचित गोविल, सचिन बंसल, दीपक गर्ग, अशोक पालीवाल, विनीत आर्य, रजत अग्रवाल, महेश भार्गव, डीसी गुप्ता कांटे वाले, संरक्षक सेठ अखिलेश जटिया, डॉक्टर सुधांशु दत्त शर्मा, विकाश वर्मा, ललित मोदी, दीपक अग्रवाल, विशाल पोद्दार, अखिलेश बैदजी, कृष्ण कुमार सिंह, रंजन बाधवा, हरजीत सिंह टीटू, संजीव बंसल, कृष्ण कुमार, महेश पोद्दार, प्रेम प्रकाश अरोरा, विशाल वाधवा, अजय शर्मा, रवि अग्रवाल, आशीष गोयल, शेखर वर्मा, चेतन प्रकाश शर्मा, शिवम् कालरा, राजीव वार्ष्णेय आदि सदस्य मौजूद रहे ।
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