सिकन्द्राबाद। ।भारत पुष्प/पवन शर्मा। नगर में चल रही रामलीला जब भगवान राम जी के ईशारे पर लक्ष्मण जी ने सुपनखा के नाक-कान अंग-भंग कर दिये तो वह रोती बिलकती खर दूषण की शरण में गयी तो सबकुछ देखकर खर दूषण राम जी से युद्ध करने पंचवटी पर पहुंच गए और लडाई करने लगे तो भगवान ने राम ने खर दूषण का वध कर निज धाम भेज दिया तो सुपनखा रावण के दरबार में जा धमकी और रोने बिलकने लगी तो रावण ने अपनी बहन की दुर्दशा देख सीता का हरण करने की ठानी और मामा मारीच / सोने के मृग की सहायता से साधू रुप धारण कर सीता माता का हरण कर लंका ले गया तो भगवान राम रोते बिलकते हुए सीता को तलाश करते हुए शबरी की कुटिया पर पहुंच गए जहा शबरी भगवान राम का लंबे समय से इंतजार कर रही थी वहा जाकर शबरी को दर्शन दिये और शबरी के झूठे बेर खाये।

दुसरी तरफ जब लंकापति रावण माता सीता का हरण ले जा रहा था तो राम भक्त जटायु नाम के गिद्ध ने रावण से युद्ध किया तो रावण ने जटायु को अधमरा कर दिया ओर जब राम जी जटायु के पास पहुंचे तो जटायु ने बताया की सीता को रावण लंका ले गया और फिर जटायु भगवान राम के धाम को चला गया। लीला का सार कथा वाचक दामोदर दास शर्मा वृंदावन वालो ने बहुत सुंदर व सरस भाषा में रसास्वादन कराया।  इस मौके पर रामलीला कमैटी के चैयरमैन सचिन शर्मा, राहुल गुप्ता, राकेश मोहन सर्राफ, जगदीश बजाज, लोकेश कोशल, अर्जुन वर्मा, अरविंद दीक्षित के अलावा सैंकड़ो भक्तगण मौजूद रहे।

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